दूर होगी यात्रियों की मुश्किल, सुगम होगा आवागमन
23 सितंबर से डेढ़ दर्जन ट्रेनों का था रूट डायवर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। डेढ़ दर्जन ट्रेनों के रूट डायवर्जन से बीते 12 दिन से मुश्किलों का सामना कर रहे यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। शुक्रवार चार अक्तूबर की आधी रात के बाद से ट्रेन का संचालन शुरू हो जाएगा। हालांकि अकबरपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के आने का सिलसिला पांच अक्तूबर की आधी रात के बाद से होगा। इससे न सिर्फ गंतव्य तक जाने के लिए यात्रियों को राहत मिलेगी बल्कि लगभग सन्नाटे में डूबी दुकानें भी गुलजार हो जाएंगी।
अकबरपुर जौनपुर रेलमार्ग पर शाहगंज स्टेशन के निकट निर्माण कार्य के चलते बीते 23 सितंबर से डेढ़ दर्जन ट्रेन का रूट डायवर्जन कर दिया गया था। इसमें इंटरसिटी, आनंदविहार, सद्भावना, किसान, दून, कैफियात, साबरमती, अमृतसर, मऊ आनंद विहार व फरक्का आदि प्रमुख ट्रेन शामिल रहीं। महज तीन ट्रेनें जम्मूतवी, वाराणसी-अहमदाबाद व वाराणसी-बरेली का ही संचालन हो रहा था। बड़ी संख्या में ट्रेनों का रूट बदल जाने के चलते दिल्ली, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गुजरात समेत अन्य प्रांतों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था। वाराणसी, जौनपुर, सुल्तानपुर, बाराबंकी व लखनऊ जाकर संबंधित ट्रेन का सहारा लेने को यात्री विवश रहे।
अकबरपुर रेलवे स्टेशन के अलग-अलग प्लेटफार्म के अलावा परिसर के बाहर स्थित दुकानों पर भी यात्रियों के न आने से व्यवसाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इससे संबंधित दुकानदारों के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो रहा था। इस बीच अब शुक्रवार मध्यरात्रि से एक बार फिर से ट्रेनों के चलने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। चार अक्तूबर की रात से चलने वाली ट्रेन यहां पांच अक्तूबर की आधी रात के बाद से चलने लगेंगी। इससे ट्रेन यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
दुकानों पर भी बढ़ेगी चहल पहल
ट्रेनों के रूट डायवर्जन के चलते रेलवे स्टेशन परिसर के अलावा बाहर स्थित अलग-अलग प्रकार की दुकानों पर लगभग सन्नाटा पसरा हुआ था। अब जबकि एक बार फिर से ट्रेनों का संचालन शुरू हो रहा है। ऐसे में दुकानदारों को दुकानों पर चहल पहल बढ़ने की उम्मीद हो गई है। चाय की दुकान करने वाले सुमित गुप्ता ने कहा कि ट्रेन के रूट डायवर्जन के चलते आर्थिक संकट खड़ा हो रहा था। अब यह समस्या दूर हो जाएगी। शीतल पेयजल की दुकान करने वाले राजेंद्र कुमार ने कहा कि ठंडे पानी की बोतल की बिक्री बहुत कम हो गई थी। पहले जहां लगभग सौ से अधिक बोतल की बिक्री होती थी तो वहीं रूट डायवर्जन के चलते बमुश्किल 20 से 25 बोतल की ही बिक्री हो रही थी।