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Ambedkar Nagar News: मंशाराम की हत्या में माफिया अजय सिपाही समेत तीन को आजीवन कारावास

Tue, 24 Feb 2026 11:41 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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आजीवन कारावास की सजा मिलने के बाद पुलिस वाहन में बैठते समय समर्थकों से अभिवादन करता माफिया अजय
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अंबेडकरनगर। महरुआ के लोकनाथपुर गांव में वर्ष 2016 में हुई सुल्तानपुर के मंशाराम की हत्या के मामले में मंगलवार को एडीजे प्रथम रामविलास सिंह ने दोषी करार दिए गए पूर्व ब्लॉक प्रमुख कटेहरी व माफिया अजय सिपाही व उसके दो गुर्गों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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जनपद सुल्तानपुर के दोस्तपुर क्षेत्र के ग्राम किशनागरपुर निवासी मंशाराम यादव को 23 मार्च 2016 को होली के दिन इसी गांव के प्रधान पद का पूर्व प्रत्याशी व पट्टीदार मुलायम यादव अपने साथी अजय कुमार यादव के साथ बुलाकर ले गए थे। इसके बाद महरुआ के लोकनाथपुर ले जाकर पूर्व ब्लॉक प्रमुख कटेहरी व माफिया अजय प्रताप उर्फ अजय सिपाही के घर पर मंशाराम की गोली मारकर हत्या कर शव को माइनर के किनारे ठिकाने लगा दिया गया था।
मृतक की बुआ चंद्रावती की तहरीर पर दोस्तपुर थाने में क्राइम नंबर शून्य पर प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना महरुआ थाने पर स्थानांतरित कर दी गई थी। मुकदमे में मृतक के मामा ओमप्रकाश यादव निवासी किशुनपट्टी की शिकायत पर अजय कुमार, मुलायम यादव के अलावा अजय सिपाही, उनके भाई विजय प्रताप सिंह, रविंद्र नाथ पांडेय व गिरेंद्र पांडेय का नाम बढ़ाया गया था। विवेचना के दौरान सामने आया कि मुलायम यादव ने चुनाव में हार की वजह मंशाराम को माना और इसी रंजिश में हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस की ओर से मुलायम यादव, अजय कुमार, अजय प्रताप व गिरेंद्र पांडेय के विरुद्ध चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की गई थी।
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इस मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कोर्ट में चली। कोर्ट ने इस मामले में बीते शनिवार को मुलायम यादव, अजय कुमार यादव व अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही को साजिशन हत्या का दोषी ठहराया था। मंगलवार को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट ने अजय सिपाही, मुलायम यादव व अजय कुमार यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही अजय सिपाही व अजय यादव पर 15-15 हजार रुपये एवं मुलायम पर 18 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।


अपहरण-डकैती से रखा जरायम की दुनिया में कदम
35 मुकदमे, सात बार गैंगस्टर, चार बार लगा गुंडा एक्ट, फिर भी पुलिस नहीं तोड़ पाई काकस
सिपाही से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक किया सफर, विधान सभा जाने के लिए भी आजमाया भाग्य
फोटो- 13 व 14
प्रमन श्रीवास्तव
अंबेडकरनगर। लग्जरी गाड़ियों के काफिले, गनर और समर्थकों के बीच रहने वाला अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही अब सलाखों के पीछे है। यूपी पुलिस में भर्ती होने के महज सात साल के भीतर अजय ने जरायम की दुनिया में कदम रखकर माफिया बनने का सफर शुरू किया। पूर्वांचल के सफेदपोश बाहुबलियों की पनाह पाकर अजय ने कई जिलों में अपना रसूख कायम किया। पुलिस ने उसके खिलाफ पिछले 21 वर्षों में सात बार गैंगस्टर, चार बार गुंडा एक्ट की कार्रवाई करते हुए कुल 34 प्राथमिकी दर्ज कीं, लेकिन अजय का काकस नहीं तोड़ पाई।
महरुआ के लोकनाथपुर गांव में दरोगा चंद्रभान सिंह व शिक्षिका विद्यावती के परिवार में जन्मा अजय प्रताप सिंह वर्ष 1998 में पुलिस विभाग में सिपाही के पद चयनित हुआ था। उसकी पहली पोस्टिंग पड़ोसी जिले सुल्तानपुर में हुई। वर्ष 2005 में अजय का नाम पहली बार डकैती, अपहरण व रंगदारी के मामले में सामने आया। गिरफ्तारी के बाद जेल में हुई मारपीट के मामले में भी अजय के खिलाफ दूसरा मामला दर्ज हुआ। 24 जून 2006 में ठेकेदारी विवाद में सुल्तानपुर के कोतवाली नगर इलाके के सीताकुंड चौराहे पर आनंद प्रकाश सिंह बॉबी सिंह और जयंत सिंह की हत्या में नाम सामने आने के बाद अजय की पहचान मुन्ना बजरंगी से हुई।
धीरे-धीरे अजय जौनपुर, अयोध्या और मऊ के बाहुबलियों के संपर्क में आने के बाद वह एक के बाद एक वारदातों को अंजाम देता रहा। वर्ष 2008 में उसे पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके अजय और तेजी से सक्रिय हुआ और देखते ही देखते अंबेडकरनगर, राजधानी लखनऊ, अयोध्या में उसके द्वारा अंजाम दी गई वारदातों की फेहरिस्त लंबी होती गई। पिछले 21 सालों में उसके खिलाफ सुल्तानपुर में तीन, लखनऊ में एक, अयोध्या में चार मामले दर्ज हुए। जिले के महरुआ थाने में 17, अहिरौली में पांच, बेवाना में तीन, अकबरपुर अलीगंज एक-एक मामले दर्ज हैं। (संवाद)


दादी की जगह चुनाव लड़कर बना कटेहरी का ब्लॉक प्रमुख

वर्ष 2015 के पंचायत चुनाव में सपा ने अजय की दादी को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया था, लेकिन उन्होंने चुनाव लड़ने से इन्कार कर दिया। इसके बाद अजय स्वयं चुनाव लड़ा और कटेहरी का ब्लॉक प्रमुख बनकर सफेदपोश बन गया। उसने अपने भाई विजय प्रताप उर्फ मिंकू की पत्नी शालिनी को भीटी चतुर्थ वार्ड नं. 26 से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव भी जिताया।
इसके बाद अजय ने वर्ष 2017 में सपा से कटेहरी का टिकट मांगा, लेकिन कामयाबी न मिलने पर निषाद पार्टी के टिकट पर बसपा के लालजी वर्मा के खिलाफ चुनाव लड़ा। इस चुनाव के दौरान लालजी वर्मा के काफिले पर हमले के बाद तीन मामले दर्ज किए गए थे। वर्ष 2017 में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2021 में जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए अपने समर्थक के नाम टिकट पाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया।
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अजय पर दर्ज प्रमुख मामले

30 मई 2005 रंगदारी न देने पर शोभानाथ यादव के अपहरण और जानलेवा हमले का लगा था आरोप।
वर्ष 2007 में राजधानी लखनऊ के बाजार खाला में ठेकेदार शत्रुघन सिंह और उनके नौकर की हत्या माफिया अभय सिंह के साथ अजय सिंह का भी नाम जुड़ा।
वर्ष 2010 में कटेहरी की ब्लॉक प्रमुख नीलम वर्मा के पति शेष कुमार वर्मा पर फायरिंग कराने का आरोप।
वर्ष 2010 में भीटी प्रमुख सुभाष सिंह की हत्या में अजय सिंह पर लगा, लेकिन इस मामले में वह दोषमुक्त हो चुका है।
वर्ष 2015 में टांडा से रायबरेली तक एनएच 232 चौड़ीकरण करने वाले कंपनी से रंगदारी मांगने का मामला।
-मार्च 2016 को होली के दिन सुल्तानपुर के मंशाराम यादव की हत्या।
वर्ष 2017 में विस चुनाव के दौरान पूर्व मंत्री लालजी वर्मा के समर्थकों पर हमले का मामला।
अयोध्या में वर्ष 2017 में जिला पंचायत सदस्य रेखा चौधरी के पति रामचंद्र चौधरी की हत्या की सुपारी दिए जाने का आरोप।
वर्ष 2023 में एनटीपीसी में कार्यदायी संस्था से रंगदारी मांगने का मामला।
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