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हिस्ट्रीशीटर की हरकतों से था ग्रामीणों में आक्रोश

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बसखारी (अंबेडकरनगर)। हिस्ट्रीशीटर शेरबहादुर की हरकतों से ग्रामीणों में लंबे समय से आक्त्रसेश था। वह अक्सर स्थानीय लोगों से उलझ जाया करता था। तमाम मौकों पर ग्रामीण उसकी हरकतों को नजरअंदाज कर दिया करते थे। इससे उसका मन और बढ़ चला था। बीती रात वह एक बार फिर से यूं ही उलझ गया। इस बार उसने संदीप से विवाद कर लिया। पहले से खार खाए बैठे ग्रामीणों ने घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसकी जमकर पिटाई कर दी जिससे बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
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घटना की जानकारी होते ही थानाध्यक्ष श्रीनिवास पाण्डेय पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस के अनुसार शेरबहादुर के खिलाफ बसखारी, राजेसुल्तानपुर, कटका, जलालपुर समेत अन्य थाने में हत्या, लूट समेत अन्य गंभीर आरोपों में आठ मुकदमे पंजीकृत हैं। लगभग चार माह पहले ही कटका पुलिस ने एक मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार किया था। लगभग दो माह पहले वह जेल से जमानत पर छूट कर बाहर आया था। इस बीच बसखारी पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर के भाई विनय कुमार यादव की तहरीर पर घेरवा मरौचा निवासी मैनू, छैनू, सेमउर खानपुर निवासी संदीप शुक्ल व कुछ अन्य के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। बताया जाता है कि पुलिस कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। थानाध्यक्ष ने बताया कि शेर बहादुर हिस्ट्रीशीटर अपराधी था। उसके भाई की तहरीर पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर मामले में छानबीन की जा रही है।
लूट व जानलेवा हमले के कई केस
ग्रामीणों की पिटाई में जिस बदमाश शेर बहादुर उर्फ मोनू की मौत हुई है, वह बसखारी थाने में हिस्ट्रीशीटर नंबर 169 ए के तौर पर दर्ज है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पहला मुकदमा बसखारी थाने में वर्ष 2016 में लूट का दर्ज हुआ। इसी वर्ष राजेसुल्तानपुर थाने में पुलिस ने लूट व बरामदगी की धारा में केस दर्ज किया। अहिरौली थाना में भी वर्ष 2016 में ही लूट व बरामदगी का केस शेरबहादुर पर दर्ज हुआ था। वर्ष 2017 में उस पर राजेसुल्तानपुर थाना में आर्म्स एक्ट समेत दो केस दर्ज हुए। वर्ष 2019 में उस पर आलापुर थाने में आर्म्स एक्ट, बसखारी थाने में धमकी तथा हत्या जैसे मुकदमे भी दर्ज किए गये। वर्ष 2020 में उसके खिलाफ अकबरपुर कोतवाली में जानलेवा हमले की धारा के अलावा 7-सीएलए एक्ट के तहत केस दर्ज हुआ था। वर्ष 2021 में उस पर मालीपुर थाने में पुलिस पार्टी पर जानलेवा हमले तथा जलालपुर थाने में जानलेवा हमला और धमकी की धाराओं में केस दर्ज हुआ। अलग अलग थानों में शेरबहादुर पर कुल 13 केस दर्ज थे।
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