बसखारी। किसान पिता के बेटे गौतम कश्यप ने आर्थिक तंगी के बीच शिक्षा ग्रहण की। सौभाग्य यह था कि अच्छी शिक्षा हासिल करने वाले गौतम को बीते दिनों 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में सहायक अध्यापक बनने का मौका मिल गया, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि वह अपनी पहली पगार नहीं ले सका। गौतम की मौत से पत्नी जहां बेसुध हो गई, वहीं माता-पिता, भाई, बहन सभी स्तब्ध हैं। दो वर्ष की बेटी भी पापा-पापा की रट लगाए हुए है। परिवार पर हुए इस वज्रपात से पूरा गांव शोक में डूबा है।
गौतम कश्यप का करीब दो माह पहले ही 69 हजार शिक्षक भर्ती में सहायक अध्यापक के पद पर चयन हुआ था। उन्हें अब तक विद्यालय आवंटन न होने के चलते वह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय अयोध्या में संबद्ध थे। बीते दिनों वह अपने घर बसखारी थाना क्षेत्र के बजदहिया पाईपुर आए थे। रविवार देर शाम बाइक से बहन व भांजे को उसके घर मखदूमनगर पहुंचाने जा रहा था। इसी बीच सुलेमपुर गांव के पास चीनी मांझे की चपेट में आकर उसका गला कट गया और मौत हो गई।
गौतम का सौभाग्य रहा कि वह सहायक अध्यापक तो बन गया, लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि वह अपनी पहली पगार तक नहीं उठा सका। परिवार पर टूटे इस पहाड़ से पत्नी अर्चना बेसुध हो गई है। पति के सहायक अध्यापक बनने की खुशियों को पंख लगते कि उसकी समूची दुनिया ही उजड़ गई। दो वर्षीय पुत्री अनन्या भी पापा-पापा की रट लगाए हुए है। माता-पिता, भाई-बहन व अन्य परिवारीजन भी स्तब्ध हैं।
आर्थिक तंगी के बीच चल रहे परिवार को गौतम की नौकरी से काफी उम्मीद जगी थी। परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन पहल भर में सब कुछ छिन सा गया। गौतम के पिता किसान हैं, जबकि माता आंगनबाड़ी सहायिका हैं। छोटा भाई मसड़ा बाजार में छोटी सी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान चलता है। गौतम की इस अचानक मौत से न सिर्फ परिवारीजन पूरी तरह अवाक हैं, बल्कि समूचे गांव में शोक की लहर है।