अंबेडकरनगर। नई मुहिम के बीच बसपा के सामने अपने गढ़ को फिर से सहेजने की बड़ी चुनौती है। राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र के कंधे पर यह जिम्मेदारी सौंप कर बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें खास मिशन पर भेजा है। पार्टी ने प्रथम चरण के कार्यक्रम में अंबेडकरनगर के लिए खास तौर पर दो दिन निर्धारित कर यह जता दिया है कि उसके लिए इस जनपद का महत्व अन्य जिलों से अलग है। अपनी सरकार के दौरान जनपद का गठन करने वाली बसपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह अंबेडकरनगर में फिर से अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए पूरी ताकत लगा देने का मन बना चुकी है।
कभी बसपा के गढ़ के तौर पर पूरे प्रदेश में पहचाने जाने वाले अंबेडकरनगर जनपद से बसपा के प्रभाव में कुछ समय से गिरावट देखने को मिली है। कभी यहां जिले की सभी पांच विधानसभा सीट से लेकर सांसद व जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा ब्लॉक प्रमुख पदों पर बसपा का कब्जा रहता था। बसपा का सबसे ज्यादा तगड़ा असर वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव में देखने को मिला था। उस समय मौजूदा जनपद की सभी पांच विधानसभा सीटों पर बसपा ने जीत का परचम लहराया था। बसपा के टिकट पर अकबरपुर से रामअचल राजभर, कटेहरी से रामदेव पटेल, जलालपुर से रामलखन वर्मा, जहांगीरगंज से घामू राम भास्कर तथा टांडा से मसूद अहमद विधायक चुने गए थे।
नागरिकों की ओर से बसपा को दिए गए इस अपार समर्थन के बाद 29 सितंबर 1995 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने इन पांच विधानसभा सीटों को मिलाकर नए जनपद की घोषणा कर दी थी। उसके बाद वर्ष 1996 में हुए चुनाव में बसपा तीन सीटों पर विजयी हुई। बसपा को लेकर जनता के प्रभाव को देखते हुए वर्ष 2002 में बसपा प्रमुख मायावती भी यहां से चुनाव लड़ने आ गईं। उन्होंने जहांगीरगंज सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ा और विजयी रहीं। उस चुनाव में बसपा को पांच में से चार सीटों पर जीत मिली। मौजूदा बसपा नेता पूर्व सांसद राकेश पांडेय उस समय सपा के टिकट से जलालपुर विधायक चुने गए थे। वर्ष 2007 में बसपा ने फिर से धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा लिया।
वर्ष 2012 के चुनाव से जिले में बसपा का प्रभाव कम होना शुरू हो गया। बीते विधानसभा चुनाव में पांच में से तीन सीटों पर बसपा को जीत मिल पाई थी। लेकिन जलालपुर सीट से जीते बसपा विधायक रितेश पांडेय के सांसद चुन लिए जाने के बाद यहां हुए उपचुनाव में बसपा को जीत हासिल नहीं हो पाई। अकबरपुर से बसपा विधायक चुने गए रामअचल राजभर व कटेहरी से चुने गए लालजी वर्मा को पार्टी ने निष्कासित कर दिया है। ऐसे में मौजूदा समय में बसपा के पास जिले में अब कोई भी विधायक नहीं है। हालांकि लोकसभा सीट जरूर रितेश पांडेय के सांसद होने के तौर पर बसपा के पास है। नौ ब्लॉक प्रमुख सीट में से सिर्फ जलालपुर की ही सीट बसपा के खाते में जाने में कामयाब रही है। अन्य सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ने का ही साहस नहीं जुटा सकी। जनपद गठन के बाद बीते दिनों पहला मौका रहा, जब जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में भी बसपा नहीं दिखी।
इन परिस्थितियों के बीच अब बसपा के सामने नई मुहिम के तौर पर अपने गढ़ को फिर से वापस पाने की चुनौती है। बसपा ने अंबेडकरनगर को सत्ता के अलावा संगठन में भी खासा महत्व दिया था। पूरे पूर्वांचल का स्थायी क्षेत्रीय कार्यालय बसपा ने अकबरपुर में ही बनवाया था। एक दौर था जब पूरे पूर्वांचल के बसपा नेताओं व कार्यकर्ताओं की विशेष बैठक बसपा प्रमुख मायावती ने मुख्यमंत्री रहते हुए अकबरपुर में की थी। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने प्रत्येक मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में अंबेडकरनगर को विकास योजनाओं की बड़ी सौगात भी दी।
अब इन्हीं सब के बूते बसपा फिर से पूरी ताकत लगाकर मैदान में जुटने जा रही है। उसने यह संदेश भी देने की कोशिश की है कि अंबेडकरनगर उसके लिए विशेष महत्व का है। इसीलिए बसपा ने अंबेडकरनगर में विशेष मुहिम के तहत दो दिन का कार्यक्रम निर्धारित किया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में बसपा यहां कई कार्यक्रम आयोजित करेगी। इसके जरिए पुराने कार्यकर्ताओं को जोड़ने के साथ-साथ जिले के विकास को लेकर बसपा की ओर से किए गए ऐतिहासिक कार्यों की चर्चा गांव-गांव घर घर की जाएगी।