अंबेडकरनगर। ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने के सख्त निर्देश के बावजूद सोमवार को परिषदीय स्कूल के शिक्षकों ने इसका पालन नहीं किया। बाहों पर काली पट्टी बांधकर शिक्षकों ने विरोध जताया। कहा कि यदि नई व्यवस्था को वापस नहीं लिया गया तो 15 जुलाई को कलेक्ट्रेट के निकट प्रदर्शन किया जाएगा। उधर शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए स्कूलों में पुलिसकर्मी भी डटे दिखे।
परिषदीय विद्यालय में तैनात शिक्षकों पर शिकंजा कसने के लिए बीते दिनों ही शासन ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराए जाने का निर्देश दिया है। उपस्थिति दर्ज कराने की इस व्यवस्था को सोमवार से लागू कर दिया गया। नई व्यवस्था के तहत शिक्षकों को सुबह पौने आठ से साढ़े आठ बजे तक जबकि दोपहर बाद दो बजे से ढाई बजे तक प्रेरणा एप के माध्यम से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
नई व्यवस्था के पहले दिन शिक्षकों ने विरोध किया। प्रांतीय आह्वान पर अलग-अलग शिक्षक संगठनों से जुड़े शिक्षकों ने बाहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। मालूम हो कि जिले के 1582 परिषदीय स्कूलों में साढ़े छह हजार शिक्षक व शिक्षामित्र तैनात हैं। शिक्षकों के विरोध को देखते हुए अलग-अलग स्कूलों में स्थानीय थानों की पुलिस टीम भी पहुंची। जिन स्कूलों में शिक्षक संघ से जुड़े पदाधिकारी तैनात हैं, वहां पर पुलिस का ज्यादा जोर रहा। हालांकि कोई गिरफ्तारी या अन्य प्रयास पुलिस ने नहीं किए।
उधर उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राघवेंद्र शुक्ला ने सोमवार को दावा करते हुए कहा कि जिले के किसी भी शिक्षक ने ऑनलाइन उपस्थिति नहीं दर्ज कराई है। आगे भी शिक्षण कार्य तो जारी रहेगा लेकिन ऑनलाइन उपस्थिति नहीं दर्ज कराई जाएगी। महामंत्री अनिल वर्मा ने कहा कि 14 जुलाई तक बाहों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जाएगा। 15 जुलाई को कलेक्ट्रेट के निकट धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
प्रभारी बीएसए हरिगोविंद सिंह ने कहा कि सोमवार को किसी भी शिक्षक ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कराई। हालांकि नई व्यवस्था को लागू कराया जाएगा।
बैठक कर बनाई रणनीति
अलग-अलग शिक्षक संगठनों की सोमवार को अकबरपुर नगर स्थित एक होटल में संयुक्त बैठक हुई। इसमें उपस्थिति दर्ज कराने की नई व्यवस्था का पूरी मजबूती से विरोध कराने का निर्णय लिया गया। शिक्षक नेता अनिल वर्मा ने कहा कि तय किया गया कि जब नई व्यवस्था को वापस नहीं लिया जाता तब तक विरोध जारी रहेगा। इसके साथ ही शिक्षकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, पुरानी पेंशन बहाल किए जाने, कैशलेस चिकित्सा व्यवस्था लागू किए जाने को लेकर आवाज बुलंद की जाएगी। इस दौरान रामसुंदर वर्मा, राकेश वर्मा, रजनीश पासवान, विवेकमणि सिंह, ज्ञानप्रकाश तिवारी, कुलदीप व शैलेश वर्मा आदि मौजूद रहे।