अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल के औचक निरीक्षण पर पहुंचे संयुक्त निदेशक राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी डॉ. अरुण कुमार सिंघल को शुक्रवार को जिला अस्पताल में सेप्ट्रॉन दवा ही नहीं मिली। एचआईवी से जुड़े 30 मरीजों को यह दवा न मिल पाने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताई। यहां संपूर्ण सुरक्षा क्लीनिक में तैनात स्राफ नर्स को जिम्मेदार मानते हुए वेतन वृद्धि रोकने का निर्देश दिया। साथ ही सीएमओ को कहा कि तत्काल प्रभाव से यह दवा यहां उपलब्ध कराई जाए।
अमर उजाला द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर शुरू की गई मुहिम लगातार अपना असर दिखा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में कई तरह की दिक्कतें सार्वजनिक हुईं जो शासन तक भी पहुंची हैं। बीते दिनों यहां अयोध्या से अपर निदेशक स्वास्थ्य जांच के लिए जलालपुर पहुंचे थे तो वहीं अब लखनऊ की राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के संयुक्त निदेशक डॉ. एके सिंघल जिला अस्पताल आए।
नियंत्रण सोसाइटी के संयुक्त निदेशक डॉ. एके सिंघल जिला अस्पताल आए। यहां वे प्रथम तल पर स्थित एड्स रोग से जुड़े संपूर्ण सुरक्षा क्लीनिक पहुंचे। यहां उन्होंने जांच किया तो पता चला कि 30 मरीजों का नाम पता दर्ज है। यह ऐसे मरीज हैं जिन्हें एड्स के साथ ही टीबी रोग भी है। इन मरीजों को पिछले तीन माह से एक जरूरी दवा सेप्ट्रॉन न मिलने की जानकारी उन्हें हुई। संयुक्त निदेशक ने यहां तैनात स्टॉफ नर्स बिंदू वर्मा को फटकार लगाया। कहा कि तीन माह से यह स्थिति होने के बाद भी जरूरी प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में उन्होंने वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए। संयुक्त निदेशक ने निरीक्षण में एप्रेन न पहनने को लेकर भी नाराजगी जताई। कर्मियों से कहा कि अनिवार्य रूप से ड्रेस का पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि हालात में सुधार नहीं हुए तो यहां तैनात कर्मचारियों के वेतन भी रोके जाएंगे। उन्होंने जिला अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं को भी परखा। इससे पहले सीएमओ कार्यालय में उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ टीबी रोग को लेकर चल रहे प्रयासों की समीक्षा भी की।
यह है सेप्ट्रॉन का काम
सेप्ट्रॉन टैबलेट एक एंटी बायोटिक दवा है। इसका उपयोग विभिन्न जीवाणु संक्रमण से ग्रसित मरीजों के लिए किया जाता है। यह टैबलेट बैक्टीरिया की वृद्धि को रोकने का काम करता है। इसी महत्वपूर्ण दवा के उपलब्ध न रहने को लेकर दौरे पर पहुंचे अधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई।
लगेगी सेपरेशन यूनिट
संयुक्त निदेशक ने जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. एएम त्रिपाठी को बुलाकर समीक्षा की। यहां मात्र 18 यूनिट खून उपलब्ध रहने पर कैंप लगाकर बढ़ोत्तरी का निर्देश दिया। प्रभारी से कहा कि ब्लड सेपरेशन यूनिट लगाने का प्रस्ताव तैयार कर भेजें जिससे यहां मरीजों को प्लेटलेट्स व प्लाज्मा आदि भी मिलने की सुविधा दी जा सके ।