अंबेडकरनगर। लगातार बारिश के बाद सोमवार को मौसम खुलते ही खेतों में हुए नुकसान का जायजा लेने की कवायद तेज हो गई। बारिश और जलभराव से धान, गन्ना, केला, सब्जी समेत अन्य फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए राजस्व और कृषि विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर सर्वे कर रही हैं। अब तक 153 किसानों ने फसल क्षति के लिए आवेदन किया है।
सर्वे में उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जहां बारिश और जलभराव का असर अधिक रहा है। टांडा, अकबरपुर और जलालपुर क्षेत्र में सर्वाधिक बारिश दर्ज की गई है। टीमें खेतों में पहुंचकर फसल की स्थिति देख रही हैं। साथ ही प्रभावित क्षेत्रफल, फसल के प्रकार और नुकसान की स्थिति की जानकारी जुटाई जा रही है। किसानों से क्षति से संबंधित आवश्यक अभिलेख भी लिए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अब तक 153 किसानों ने आवेदन किया है। इससे प्रभावित किसानों का प्रारंभिक ब्योरा सामने आया है। हालांकि सर्वे पूरा होने के बाद ही फसल क्षति की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अधिकारियों के मुताबिक सर्वे रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराई जाएगी।
किसानों को सर्वे से मुआवजे की उम्मीद
बारिश से फसल खराब होने के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जमौली निवासी प्रेमचंद ने बताया कि धान समेत अन्य फसलों में इस समय काफी लागत लग चुकी है। तैयार फसल प्रभावित होने से मेहनत और लागत दोनों पर असर पड़ा है। अब किसानों की नजर सर्वे रिपोर्ट और उसके आधार पर मिलने वाली राहत पर है। बड़ागांव निवासी फूलचंद ने बताया कि लेखपाल और कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर फसल क्षति की जानकारी दी गई है।
39 घर हुए क्षतिग्रस्त
राजेसुल्तानपुर। बारिश के दौरान जिले के अलग-अलग तहसील क्षेत्रों में अब तक 39 कच्चे घर क्षतिग्रस्त होने की सूचना दर्ज की गई है। बहोरिकपुर गांव में रविवार रात श्यामलाल प्रजापति पुत्र स्व. सज्जन प्रजापति का खपरैलनुमा कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि परिवार के लोग मकान के बाहर करकट के बरामदे में सो रहे थे। इससे सभी सुरक्षित बच गए। मकान का अधिकांश हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया। श्यामलाल सिंघलपट्टी में गुमटी लगाकर पान बेचते हैं। इसी से परिवार का भरण-पोषण होता है। मकान गिरने के बाद परिवार के सामने बारिश में सिर छिपाने और घरेलू सामान सुरक्षित रखने का संकट खड़ा हो गया है। सामाजिक कार्यकर्ता मित्रसेन ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने प्रशासन से क्षतिग्रस्त कच्चे मकानों का सर्वे कराने, आर्थिक सहायता देने और पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की।
टीमें कर रहीं सर्वे
सभी टीमें सर्वे कर रही हैं। जल्द फसलों को हुए नुकसान का ब्योरा तैयार कर शासन को भेजा जाएगा और उचित मुआवजा दिलाया जाएगा। कच्चे घर ध्वस्त होने के मामले में सहायता प्रदान की जा चुकी है।
ईशा प्रिया, डीएम