अंबेडकरनगर। मौजूदा विधायक का टिकट काटना टांडा में भाजपा को काफी महंगा पड़ा। यहां से पहली बार चुनाव लड़ रहे सपा प्रत्याशी व पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने धमाकेदार जीत हासिल की है। उन्होंने न सिर्फ अल्पसंख्यक वर्ग को टिकट न मिलने से पैदा हुई नाराजगी को दूर किया वरन बीजेपी से स्थानीय सजातीय प्रत्याशी होने के बावजूद अपने वर्ग के मतों का बड़ा समर्थन भी हासिल कर सभी को चौकाया। इसके सहारे ही इस सीट पर सपा ने बड़े अंतर से जीत हासिल कर इतिहास रचा।
सामान्य तौर पर टांडा विधानसभा सीट कुर्मी व मुस्लिम बाहुल्य मतदाताओं वाली मानी जाती है। इसी लिए टांडा से इस बार सपा का टिकट हासिल करने के लिए अल्पसंख्यक वर्ग के कई दावेदार मैदान में दावेदारी ठोक रहे थे। इसके बावजूद सपा ने ने सभी को चौंकाते हुए अकबरपुर से विधायक रह चुके पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा। इसे लेकर अल्पसंख्यकों के बीच कई जगह से विरोध के स्वर भी उठने लगे थे। पार्टी के कई कार्यकर्ता बगावत पर उतर आए थे।
ऐसे में माहौल को भुनाने के लिए बसपा ने मनोज वर्मा का टिकट काटकर किछौछा नगर पंचायत की चेयरमैन शबाना खातून को थमा दिया। बाद में भाजपा ने कुर्मी वर्ग के बीच से निकले नेता कपिलदेव वर्मा को टिकट दे दिया। इससे कुर्मी मतों में बटवारे की उम्मीद नजर आने लगी थी। सपा प्रत्याशी राममूर्ति वर्मा ने इसी का फायदा उठाते हुए सजातीय मतों का बड़ा हिस्सा अपने खेमें में कर लिया। बीते दिनों हुए पंचायत चुनाव में कपिलदेव खुद जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गए थे, जबकि उनकी पत्नी को क्षेत्र पंचायत सदस्य के पद पर हार का सामना करना पड़ा था।
इस सीट पर बीते चुनाव में भाजपा की संजू देवी जीती थी। कोरोना काल में उनके प्रतिनिधि श्यामबाबू गुप्त ने अस्पतालों में लगातार पहुंचकर अथक सेवा की थी। योजनाओं का लाभ दिलाने से लेकर संगठन की मजबूती तक में लगातार योगदान देते रहने के बावजूद संजू देवी का टिकट कटने से तमाम कार्यकर्ता नाराज हो गए थे। संजू का टिकट काटने की कोई खास वजह न रहने के बावजूद पार्टी को उनका टिकट काटना आखिरकार महंगा पड़ा। सपा प्रत्याशी राममूर्ति ने बड़ी जीत दर्ज कर टांडा सीट पर इतिहास रच दिया।