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ग्रामीण बैंक की 48 ब्रांचों में करेंसी नहीं

Sun, 20 Nov 2016 12:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबेडकरनगर
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अंबेडकरनगर जिला मुख्यालय स्थित बैंक आफ बड़ौदा के एटीएम के बाहर धन-निकासी के लिए लगी उपभोक्ताओं की लंबी लाइन। - फोटो : अमर उजाला
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पुराने बड़े नोट पर बैन के बाद करेंसी का संकट शनिवार को जिले में और ज्यादा गहरा गया। बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की सभी 48 शाखाओं में पैसा समाप्त हो गया है। नतीजतन सभी 48 शाखाओं में भुगतान लगभग ठप है। उधर, जिले के अन्य बैंकों में भी धनाभाव के चलते समुचित निकासी नहीं हो पा रही है। इससे रुपये के लिए उपभोक्ताओं की मुश्किलें जस की तस बनी हुई हैं।
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उपभोक्ताओं ने प्रशासन से मामले में हस्तक्षेप की मांग की हैै। जिले में पुरानी बड़ी करेंसी पर बैन के बाद से हालात सामान्य होने का नाम नहीं ले रहे। दस दिन बीत जाने के बाद भी उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम नहीं हो पा रहीं। कारण यह कि बैंकों तक पर्याप्त रकम पहुंचा पाने में ही बैंक प्रबंधन फेल साबित हो रहा है। धनाभाव का संकट दिन बढ़ने के साथ ही घटने के बजाए बढ़ता जा रहा हैै।

शनिवार को हालात और ज्यादा खराब रहे। बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की 48 शाखाओं में शनिवार को करेंसी का पूरी तरह टोटा बना रहा। हालत यह थी कि धन-निकासी का काम इन सभी शाखाओं में पूरे दिन लगभग ठप ही रहा। बैंक शाखाओं को दरअसल चेस्ट से जो रकम मिलनी थी, वह मिल नहीं पाई।
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नतीजतन जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्र की सभी शाखाओं में धन-निकासी का काम लगभग ठप रहा। जिन शाखाओं में स्थानीय लोग नगदी जमा कराने पहुंचे, उन्हीं शाखाओं में कुछ ही ग्राहकों को वही पैसे थोड़ा-थोड़ा भुगतान के रूप में दिया गया।

 जिला मुख्यालय पर अन्य बैंकों की विभिन्न शाखाएं स्थापित होने के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना उतना अधिक नहीं करना पड़ा क्योंकि अन्य शाखाओं में खाते होने के चलते जरूरी काम चल गए। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों की बैंकिंग व्यवस्था मुख्य रूप से इन्हीं शाखाओं पर निर्भर है। ज्यादातर लोगों के एक ही बैंक खाते ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं और वह भी उन्होंने इसी बैंक की शाखा में खुलवा रखा है।

ऐसे लोगों को एक दिन पहले शुक्रवार को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था लेकिन शनिवार को तो स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई। भुगतान न होने के चलते घंटों लाइन लगाने को विवश उपभोक्ताओं को निराश होकर वापस लौटना पड़ा। ग्रामीण बैंक के मैनेजर अनिल कुमार ने स्वीकार किया कि उन्हें ऊपर से कैश नहीं मिल पाया है।

उधर जिला मुख्यालय समेत ग्रामीण क्षेत्र की अन्य बैंक शाखाओं में भी धनाभाव का संकट उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत का सबब बना रहा। स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ बड़ौदा समेत अन्य बैंक की शाखाओं में कई बार धनाभाव के चलते या तो भुगतान रोक दिया गया या फिर मामूली रकम देकर ही ज्यादातर ग्राहकों को टरकाया गया। एलडीएम अरुण कुमार सिंह  ने बताया कि बैंकों में समुचित कैश के प्रबंध कराए जा रहे हैं। उच्चाधिकारी इसे लेकर काफी गंभीर हैं। कुछ बैंकों में पैसे का संकट जरूर है। उसे दूर कराने का प्रयास चल रहा है। 
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