गौसपुर ककरहिया गांव में कपड़े सिलाई करती महिलाएं।
अंबेडकरनगर। हौंसले हों तो कोई भी मंजिल कठिन नहीं होती है। मजबूत इरादों से हर मुकाम हासिल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ किया है स्नातक पास जलालपुर क्षेत्र के गौसपुर ककरहिया गांव की रहने वाली रीता ने। ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी रीता ने समूह से जुड़ने के बाद जहां अपने जीवन को संवारा, वहीं गांव की अन्य महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हैं। तीस हजार की पूंजी से होजरी कपड़ों का काम करने वाली रीता अपने संघर्ष के दम पर आज लाखों रुपये के कारोबार को कर रही हैं। वर्ष 2019 में गांव के सरस्वती समूह से जुड़ने के बाद 2022 में उन्हें समूह सखी बनाया गया। इन्होंने शुरूआत में 30 हजार का ऋण लेकर एक कमरे में तीन मशीनों का सेटअप लगा अपना काम शुरू कर दिया। इसके बाद इन्होंने पलट कर नहीं देखा। अब इनके यहां दस मशीनें लगी हुई हैं, इसमें 12 से 15 गांव की महिलाएं काम कर रही हैं। इससे जहां रीता को 15 से 20 हजार रुपये तक की आमदनी हो जाती है। वहीं अन्य महिलाओं को भी पांच से सात हजार रुपये की कमाई हो जाती है।
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छोटे बाजारों में पकड़
रीती के कारखाने में लोवर,टी-शर्ट, ट्रैक सूट, लैगी आदि कई तरह के होजरी का सामान बनता है। इसकी सप्लाई स्थानीय बाजार से लेकर अकबरपुर, पडोसी जिला आजमगढ़, सुल्तानपुर व अयोध्या के ग्रामीण क्षेत्रों में होती है। बड़े दुकानदारों के यहां पर जहां इनकी कम खपत है, वहीं छोटे कारोबारियों के यहां पर इनकी सेल अधिक है।