अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल में डायलिसिस का कार्य प्रारंभ होने का मरीजों को बढ़-चढ़कर लाभ मिल रहा है। डायलिसिस के लिए उन्हें दूसरे जनपदों में जाने से राहत मिल रही है। जिला अस्पताल में डायलिसिस का कितना लाभ मरीजों को मिल रहा है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक डायलिसिस के लिए कुल 45 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन करा रखा है। प्रतिदिन 18 मरीजों की डायलिसिस की जा रही है। डायलिसिस के लिए लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए स्टाफ की संख्या भी शीघ्र ही बढ़ाए जाने की तैयारी है।
लगभग डेढ़ माह पूर्व जिला अस्पताल में डायलिसिस का कार्य प्रारंभ हुआ था। जिला अस्पताल में 10 बेड वाले वार्ड में डायलिसिस का संचालन कार्यदायी संस्था दीपचंद्र डायलिसिस केयर को सौंपी गई थी। डायलिसिस के लिए आने वाले मरीजों को किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए एक मैनेजर के अलावा 3 टेक्नीशियन, 2 हाउस कीपिंग व एक स्टाफ नर्स की तैनाती भी कर दी गई थी। निशुल्क डायलिसिस की शुरुआत हुई, तो न सिर्फ अंबेडकरनगर जनपद, बल्कि इर्दगिर्द के जनपद के उन मरीजों ने राहत की सांस ली, जिन्हें डायलिसिस के लिए दूसरे जनपदों या फिर प्रांतों में जाना पड़ता था। जिला अस्पताल में शुरू हुए डायलिसिस का मरीजों को कितना लाभ मिल रहा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इसके लिए 45 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
एजेंसी के मैनेजर अखिलेश तिवारी ने बताया कि डायलिसिस के लिए कुल 45 मरीजों का पंजीकरण हुआ है। प्रतिदिन 18 मरीजों की डायलिसिस होती है। 10 बेड वाले वार्ड में 6 बेड का संचालन किया जा रहा है। जिस प्रकार से डायलिसिस कराने वालों की संख्या में वृद्धि हो रही हे, उसे देखते हुए शीघ्र ही स्टाफ में वृद्धि की जाएगी।
मरीजों को दौड़भाग से मिली राहत
टांडा निवासी सुषमा ने कहा कि वे डायलिसिस कराने के लिए लखनऊ जाती थीं। इससे न सिर्फ आर्थिक चपत लगती थी, बल्कि समय भी काफी लगता था। अब जबकि जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा हो गई, तो ऐसे में वे यहीं करा रही हैं। इससे उन्हें काफी राहत मिली है। मुबारकपुर की पुष्पा ने कहा कि उन्हें डायलिसिस के लिए गोरखपुर जाना पड़ता था। जिस दिन जाना पड़ता था, उन्हें बहुत मानसिक तनाव रहता था। लंबी दौड़, उस पर आने जाने में काफी खर्च भी हो जाता था। जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा शुरू होने से न सिर्फ मानसिक रूप से राहत मिली हे, बल्कि धन भी खर्च नहीं करना पड़ता है। जलालपुर के अहमद ने कहा कि जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा प्रारंभ होने से उन्हें अब बनारस तक की दौड़ लगाने से राहत मिली है। रफीगंज निवासी फूलचंद्र ने कहा कि उनका इलाज दिल्ली चल रहा था। इलाज के साथ साथ वहीं पर डायलिसिस भी होती थी। जब पता चला कि जिला अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा शुरू हो गई है, तो वे अपने घर चले आए। अब घर से ही डायलिसिस के लिए जिला अस्पताल जाते हैं।
सुचारु रूप से हो रही डायलिसिस
डायलिसिस का कार्य सुचारु रूप से चल रहा है। 10 बेड की तुलना में 6 बेड पर डायलिसिस हो रही है। शीघ्र ही स्टाफ में वृद्धि कर सभी 10 बेड पर संचालन प्रारंभ कर दिया जाएगा। प्रतिदिन 18 मरीजों की डायलिसिस होती है।
डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस