अंबेडकरनगर। नगर पालिका के अमराैला वार्ड में ऊसर की जमीन के फर्जीवाड़ा के केस में पैरवी करने से मुकरने वाले अतिक्रमण प्रभारी अनिल मिश्र को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही प्रकरण की जांच जलकल के जेई शैलेंद्र कुमार सिंह को सौंपी गई है।
ये प्रकरण तीन साल पुराना है। अनिल मिश्र ने 14 दिसंबर 2022 को अमरौला की गेना देवी और गुलशन के खिलाफ फर्जीवाड़ा करके ऊसर की जमीन की खरीद बिक्री का आरोप लगाया था। इस प्रकरण में कोतवाली पुलिस ने 12 मार्च 2023 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर फाइल सीओ कार्यालय भेज दी थी। वहां से रिपोर्ट सीजेएम कोर्ट में जमा कर दी गई। बताया जा रहा है कि इस प्रकरण में समन जारी हुए होंगे जिसके जवाब में वादी अनिल मिश्र ने 24 सितंबर 2024 को लिखित में दे दिया कि वह मुकदमे की पैरवी नहीं करना चाहते हैं। ये प्रकरण अधिशासी अधिकारी बीना सिंह को पता चला तो उन्होंने अनिल से स्पष्टीकरण देने को कहा। स्पष्टीकरण संतोषजनक न मिलने पर उन्होंने बुधवार को अनिल मिश्र को निलंबित कर दिया। ईओ ने बताया कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालाें पर सख्त कार्रवाई होगी।
ये है प्रकरण
पूर्व में अमरौला में तरसू को एक बिस्वा जमीन का आवासीय पट्टा मिला था। वर्ष 2012-13 में जब नगर पालिका ने सर्वे कराया, उस वक्त उक्त जमीन पर तरसू के बेटे राम अजोर, कुल्लू, राम शब्द और गुलशन मकान बनाकर रह रहे थे। वर्ष 2020 में राम अजोर, कुल्लू और राम शब्द ने अपने हिस्से की जमीन लालचंद्र चौहान को विक्रय कर दी थी। गुलशन ने अपने हिस्से की जमीन के बजाय ऊसर का बैनामा गेना देवी को कर दिया। इसी आधार पर गुलशन और गेना देवी पर केस दर्ज कराया गया था जिसमें पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी और वादी मुकदमा भी बाद में मुकर गया।