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ताक पर सीएम की प्राथमिकता, धूल फांक रही डायलिसिस मशीन

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अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में डायलिसिस के लिए पहुंची मशीनें। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अश्विनी मिश्र
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अंबेडकरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता में शामिल होने के बावजूद जिला अस्पताल में डायलिसिस सुविधा शुरू करने को लेकर जिम्मेदारों को कोई परवाह नहीं है। तीन माह पहले यहां डायलिसिस सेवा शुरू करने के लिए छह मशीनें लाकर रखी गई हैं, लेकिन इनका लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इसकी वजह यह है कि मशीनें स्थापित करने को लेकर सिस्टम लापरवाह नजर आ रहा है। सिविल वर्क के साथ ही इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल वर्क भी पूरा कर लिया गया है। इसके बावजूद मशीनें नहीं लगाई जा रही हैं।
सूबे की सत्ता संभालने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इसका स्वागत हुआ था। कारण यह कि डायलिसिस के लिए मरीजों को दूसरे जिलों का चक्कर लगाने को विवश होना पड़ता है।
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सरकार की घोषणा के अनुरूप अंबेडकरनगर में भी डायलिसिस यूनिट की स्थापना का काम शुरू हुआ था। मरीजों व तीमारदारों को लगा कि जल्द ही इस महत्वपूर्ण सेवा का लाभ जिले में मिलने लगेगा, लेकिन विभागीय मनमानी व लापरवाही के चलते अब तक ऐसा नहीं हो सका। जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट स्थापना का जिम्मा दीपचंद्र डायलिसिस सेंटर को सौंपा गया।
जिला अस्पताल के अधिकारियों को इसके पर्यवेक्षण का जिम्मा दिया गया। लापरवाही की हद यह कि यहां लगभग तीन महीने से डायलिसिस की छह मशीनें धूल फांक रही हैं, लेकिन उनका लाभ मरीजों को जल्द से जल्द दिलाने की सुध जिम्मेदारों को नहीं है। न तो विभागीय अधिकारियों और न ही प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास है।
कई मरीजों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जितने जोश व जिम्मेदारी से ऐसी घोषणाएं की जाती हैं, उतनी ही जिम्मेदारी के साथ यह मॉनिटरिंग भी लगातार होनी चाहिए कि घोषणाओं के बाद उसका पालन किस हद तक हो रहा है या फिर पालन न हो पाने के जिम्मेदार लोग कौन हैं।
मरीजों की यह चिंता व नाराजगी जायज भी है। ऐसा इसलिए क्योंकि जिला अस्पताल के भूतल स्थित रसोई घर के बगल डायलिसिस यूनिट के लिए एक हाल आवंटित किया जा चुका है। इसी में डायलिसिस के लिए आईं छह मशीनें रखी गई हैं। सिविल वर्क के बाद इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल वर्क भी पूरा हुए करीब एक माह बीतने को हैं, लेकिन मशीनों को बाकायदा स्थापित कर सेवा शुरू करने की जल्दी नहीं दिख रही। किडनी रोग से परेशान मरीज ऐसे में अभी भी अयोध्या, लखनऊ, वाराणसी, आजमगढ़ या फिर प्रयागराज जैसे शहर का चक्कर लगाने को विवश हो रहे हैं।
हो चुके हैं यह कार्य
जिला अस्पताल में डायलिसिस यूनिट के लिए आरओ प्लांट लगाया जा चुका है। विद्युत पैनल का काम पूरा हो गया है। वाटर सप्लाई व टॉयलेट निर्माण का काम भी पूरा कर लिया गया है। फर्श पर टाइल्स लगाने का काम पूरा है, जबकि बेड अभी नहीं लगाया जा सका है।
13 बेड की बन रही यूनिट
डायलिसिस यूनिट 13 बेड की बनाई जा रही है। इसमें 10 पॉजिटिव व तीन निगेटिव श्रेणी के मरीज भर्ती किए जाएंगे। अस्पताल पीपीपी मोड पर संचालित होगा या निजी एजेंसी मशीनें स्थापित कर इसे संचालन के लिए जिला अस्पताल को सौंप देगी, अभी इस पर भी निर्णय होना बाकी है।
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जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. हर्षित गुप्ता ने बताया कि डायलिसिस यूनिट स्थापना के लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं। निजी कंपनी के इंजीनियर एक सप्ताह बाद यहां विजिट करेंगे। इसके बाद मशीनों की स्थापना का काम वही करेंगे। उम्मीद है कि नए साल की शुरूआत में इसका लाभ मरीजों को मिल सके।
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