फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ब्लॉकों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल खोले जाने से खुशी

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। केंद्रीय बजट से जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद जगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ सेंटर खोले जाने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोत्तरी की घोषणा ने भी जनपदवासियों को उत्साहित किया है। टैक्स स्लैब में परिवर्तन न करने से कर्मचारियों समेत तमाम नागरिकों को झटका जरूर लगा है, लेकिन अगले दो वर्ष में आय दोगुनी करने के भरोसे ने किसानों में एक नई उम्मीद जगाई है। पोषण पर जोर, जलजीवन मिशन शहरी योजना को लागू करने तथा रेलवे में ब्राडगेज के संपूर्ण विद्युतीकरण की घोषणा का भी नागरिकों ने स्वागत किया है। युवाओं ने आमतौर पर निराशा जताते हुए कहा कि जितनी उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हुई।
विज्ञापन

केंद्रीय बजट के सदन में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो जनपदवासियों की नजरें टीवी पर टिक गईं। बजट पेश होने के बाद मिलीजुली प्रतिक्रिया सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए बजट में की गईं विभिन्न प्रकार की घोषणाओं से जनपदवासियों को बेहतर इलाज की उम्मीद बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ सेंटर खोले जाने तथा ब्लॉकों में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल खोले जाने की घोषणा ने आम नागरिकों के चेहरे पर चमक ला दी। बजट में प्राथमिक स्तर से उच्च स्तर तक की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की घोषणा से एक उम्मीद नागरिकों में जगी कि बेहतर इलाज के लिए उन्हें इधर-उधर नहीं भटकना होगा।
पीएम आत्मनिर्भर स्वास्थ्य योजना के साथ ही स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी को लेकर कई अन्य घोषणाओं का नागरिकों ने बढ़-चढ़कर स्वागत किया। जलजीवन मिशन शहरी को लांच किए जाने का स्वागत करते हुए कहा कि निश्चित रूप से इससे शुद्ध पेयजल की उपलब्धता बढ़ेगी। किसानों ने खुुशी का इजहार करते हुए कहा कि वर्ष 2022 तक आय दोगुनी करने को लेकर जो भरोसा दिलाया गया है, उससे नई उम्मीद जगी है। किसानों ने कहा कि कृषि ऋण का लक्ष्य बढ़ाए जाने तथा डेयरी के लिए समुचित रकम का प्रबंध करने से किसानों को और ज्यादा लाभ मिलेगा। बजट को लेकर अमर उजाला ने अलग-अलग क्षेत्र के नागरिकों से वार्ता की, जो इस तरह रही।
विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार
जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. योगेश वर्मा ने कहा कि प्राइमरी स्तर से उच्च स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किए जाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ केयर सेंटर खोले जाने की घोषणा से स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार हाहेगा। ऐसा होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को बेहतर इलाज के लिए इधर-उधर की दौड़ लगाने से राहत मिलेगी।
क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल से मिलेगा लाभ
त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्ञानदीप ने कहा कि बजट अत्यंत सराहनीय है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए बजट में तमाम प्रकार की घोषणाएं की गई हैं। लगभग छह सौ ब्लॉक में क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल खोले जाने की घोषणा अत्यंत सराहनीय है। इससे स्वास्थ्य सुविधा में व्यापक सुधार होने की संभावना है। बीमारियों की जांच व पहचान के लिए नए सेंटर स्थापित किए जाने का भी लाभ देशवासियों को मिलेगा।
घोषणा को जमीनी हकीकत दी जाए
किसान वीरेंद्र ने कहा कि बजट में किसानों के लिए कई घोषणाएं की गई हैं। किसानों की आय दोगुनी किए जाने की घोषणा से किसानों को एक उम्मीद बंधी है। किसान विभिन्न प्रकार की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बजट में किसानों के उत्थान के लिए जो घोषणा की गई है, वह अत्यंत सराहनीय है। बस जरूरत है कि जो घोषणा की गई है, उसे जमीनी हकीकत दी जाए।
युवाओं के हाथ लगी मायूसी
युवा बालगोविंद ने कहा कि बजट से युवाओं को मायूसी हाथ लगी है। कोरोना संकट में नौकरी समाप्त हो गई है। बेरोजगारी बढ़ी है। तमाम युवा बेरोजगार हो गए हैं। रोजगार के लिए बजट में कोई विशेष पैकेज नहीं दिया गया है। बजट में युवाओं को व्यापक रोजगार दिए जाने व उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर घोषणा की जानी चाहिए थी। बजट से युवा खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
बेटियों के लिए बजट में बेहतर स्थान
गृहणी मीना देवी ने कहा कि कोरोना संकट के बीच जो बजट आया है, वह सराहनीय है। हालांकि महिलाओं के लिए बजट में और जगह दिए जाने की जरूरत थी। महिलाओं की सुरक्षा व उनके आत्मनिर्भर बनने के लिए संचालित योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए। बेटियों के लिए बजट में बेहतर स्थान दिया गया है।
मदरसा शिक्षकों को लगा झटका
मॉडर्न मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद जमाल अहमद अंसारी ने कहा कि बजट से मदरसा शिक्षकों को मायूसी हाथ लगी है। कहा कि चार वर्ष का मानदेय बकाया है। इसके भुगतान के लिए कोई घोषणा बजट में नहीं की गई। मानदेय भुगतान के लिए जो बजट घोषित किया गया है, वह विगत वर्ष की तुलना में कम कर दिया गया। इससे मदरसा शिक्षकों को बड़ा झटका लगा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें