अंबेडकरनगर। पर्यावरण संरक्षण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए तीन प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट स्थापित की जा रही हैं। ये यूनिटें अकबरपुर के सस्पना, कटेहरी के भिउरा और रामनगर के बहरामपुर गांव में बन रही हैं। यहां पर प्लास्टिक कचरे को एकत्रित कर रिसाइकिल किया जाएगा और उसे अन्य कार्यों में इस्तेमाल लायक तैयार किया जाएगा।
प्रत्येक यूनिट का निर्माण करीब 1500 वर्ग फीट क्षेत्रफल में किया जाएगा, जिस पर लगभग 16 लाख रुपये की लागत आएगी। इन केंद्रों में अत्याधुनिक मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे अब जिले में प्लास्टिक कचरे को खुले में फेंकने या जलाने की समस्या पर रोक लगेगी। इन यूनिटों के शुरू होने के बाद गांवों और कस्बों में एकत्र प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण संभव हो सकेगा। इससे नालियों के जाम, जलभराव और प्रदूषण की समस्या से राहत मिलेगी।
यहां तैयार किए गए प्लास्टिक बंडल रिसाइकिलिंग फैक्टरियों को भेजे जाएंगे, जहां से पुनः उपयोगी उत्पाद बनाए जाएंगे। इस पहल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को आर्थिक मॉडल से जोड़ा गया है तथा स्थानीय युवाओं और स्वच्छता समितियों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
ये तीन मशीनें बदलेंगी तस्वीर
ट्विन शाफ्ट श्रेडर मशीन- यह मशीन दो मजबूत धारदार ब्लेड वाले शाफ्ट से बनी होती है, जो प्लास्टिक कचरे जैसे बोतलें, डिब्बे, पाइप और पैकिंग मैटीरियल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट देती है। यह तकनीक अपशिष्ट की मात्रा घटाने, जगह बचाने और प्रदूषण कम करने में मददगार है।
हाइड्रोलिक प्लास्टिक बेलिंग मशीन- यह मशीन कटा हुआ या छांटा गया प्लास्टिक कचरा दबाव से सघन कर बड़े बंडलों (बेल्स) में बदल देती है। इसमें हाइड्रोलिक तकनीक का उपयोग होता है, जो उच्च दबाव प्रदान कर प्लास्टिक का आयतन काफी घटा देती है।
एयर ब्लोअर (फटका मशीन)- शक्तिशाली हवा के प्रवाह से हल्के प्लास्टिक (जैसे पॉलिथीन, पैकिंग शीट) और भारी प्लास्टिक (जैसे बोतलें, कंटेनर) अलग दिशाओं में उड़ जाते हैं। इससे प्लास्टिक को श्रेणियों में बांटना आसान हो जाता है।
स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। कार्य की प्रगति पर सतत निगरानी रखी जा रही है, ताकि यह परियोजना समय से पूरी हो और ग्रामीण क्षेत्रों को स्वच्छता की नई पहचान मिले। - सर्वेश पांडेय, जिला पंचायत राज अधिकारी