अंबेडकरनगर। जिला अस्पताल की ओपीडी मंगलवार को एक बार फिर मरीजों की भीड़ से जूझती नजर आई। सुबह से ही बड़ी संख्या में मरीजों और उनके तीमारदारों की कतारें मुख्य गेट से लेकर पर्चा काउंटर, जांच केंद्र और दवा वितरण तक नजर आईं। करीब दो हजार मरीजों ने इलाज के लिए पंजीकरण कराया, जिससे घंटों लाइन में लगने के बाद भी कई मरीज डाॅक्टर तक नहीं पहुंच सके और उन्हें बिना इलाज के ही लाैटना पड़ा।
भीड़ का दबाव सबसे ज्यादा ओपीडी, लैब और फार्मेसी पर देखा गया। पर्चा बनवाने से लेकर चिकित्सकों से परामर्श और दवा लेने तक मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। स्टाफ पर अतिरिक्त भार पड़ने से कार्य प्रभावित हुआ और कई मरीजों ने शिकायत की कि उन्हें चिकित्सकों से पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल के प्रयोगशाला में भी रिपोर्ट तैयार करने में देरी हुई। दवा वितरण केंद्र पर भी मरीजों को काफी देर तक प्रतीक्षा करनी पड़ी। इजाज कराने आए रमेश कुमार, सावित्री आदि मरीजों का कहना था कि डॉक्टरों के पास लगातार मरीजों की भीड़ लगी रही, जिससे घंटों लाइन में लगने के बाद भी डाॅक्टर तक नहीं पहुंच सके। बिना इलाज के ही वापस लाैटना पड़ा। मरीजाें का कहना है कि अधिक भीड़ होने से जांच और उपचार की गुणवत्ता प्रभावित हुई।
मरीजों की बढ़ी संख्या
मंगलवार को ओपीडी खुलते ही बड़ी संख्या में मरीज पहुंचे। पर्चा काउंटर, फार्मेसी और लैब में अतिरिक्त स्टाफ की व्यवस्था की गई थी। सभी विभागों ने समन्वय के साथ कार्य किया और मरीजों को आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई गईं।
डॉ. पीएन यादव, प्रभारी सीएमएस
मौसम के बदलाव से बढ़े त्वचा रोग के मरीज
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मौसम में हो रहे लगातार उतार-चढ़ाव का प्रभाव त्वचा रोगों पर भी देखने को मिल रहा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में मंगलवार को त्वचा रोग से पीड़ित 98 मरीज पहुंचे, जो सामान्य संख्या से तीन गुना अधिक है। आमतौर पर प्रतिदिन 35 से 40 मरीज ही त्वचा विभाग में पहुंचते हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके चौधरी ने बताया कि मौसमी बदलाव, उमस और बैक्टीरियल संक्रमण के कारण फंगल इंफेक्शन, खुजली और एलर्जी जैसे रोग बढ़ रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण विभागीय स्टाफ पर भी अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।