अंबेडकरनगर। विभिन्न एजेंसियों के खाते में धन न होने का खामियाजा साढ़े तीन हजार से अधिक किसानों को भुगतना पड़ रहा है। धान बेचने के बाद इनका सवा पांच करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान बकाया है।
भुगतान पाने के लिए ये किसान लगातार संबंधित एजेंसी के कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। भुगतान न होने से इनको विभिन्न प्रकार की आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि शासनादेश के अनुसार बिक्री के तीन दिन के अंदर भुगतान कर देना चाहिए लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो रहा है। तीन दिन की बात दूर, एक पखवाड़े से भी अधिक का समय बीत गया है लेकिन भुगतान नहीं हो सका है। इसकी शिकायत कई बार जिम्मेदार अधिकारियों से की गई लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
एक तरफ जहां केंद्र प्रभारियों की लापरवाही के चलते किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है, वहीं धान बेचने वाले किसानों को भुगतान के लिए भी संबंधित एजेंसी के कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
शासनादेश के अनुसार धान बेचने के तीन दिन के अंदर संबंधित एजेंसी को भुगतान करना चाहिए। मौजूदा समय में आलम यह है कि धान बेचे एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत गया है लेकिन साढ़े तीन हजार से अधिक किसानों का 5.25 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो सका है।
खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय के लिपिक सूरज कुमार ने बताया कि एजेंसी के खाते में धन न होने से ही भुगतान में समस्या उत्पन्न हो रही है। गौरतलब है कि पहली नवंबर से जिले के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित छह एजेंसियों के 84 क्रय केंद्रों पर धान की खरीद का कार्य प्रारंभ हुआ था। जिले को 1 लाख 32 हजार 600 मीट्रिक टन का लक्ष्य मिला है।
खरीद का लगभग पौने दो माह बीतने को है लेकिन अब तक 6264 किसानों के 57751.146 एमटी धान की ही खरीद हो सकी है। यह खरीद दिए गए लक्ष्य का 43.553 प्रतिशत है। इस बीच समय पर भुगतान न होने से संबंधित किसानों को विभिन्न प्रकार की आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
बरधाभिउरा के मंगल वर्मा ने कहा कि उन्होंने 8 दिसंबर को धान की बिक्री सिझौली स्थित क्रय केंद्र पर की थी। ऑनलाइन सभी कागजात उसी समय केंद्र पर जमा कर दिया गया था। इसके बाद भी अब तक भुगतान नहीं हो सका है। इसके लिए कई बार संबंधित एजेंसी का चक्कर लगाया लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा रहा है।
सम्मनपुर निवासी विनोद वर्मा ने कहा कि उन्होंने बीते दिनों बसखारी स्थित एक क्रय केंद्र पर धान की बिक्री की थी। उस समय धन न होने का हवाला देकर दो-तीन दिन में खाते में रकम भेजे जाने का आश्वासन दिया गया था।
एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक खाते में राशि नहीं भेजी जा सकी है। भीटी के ज्ञानप्रकाश ने कहा कि एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक भुगतान नहीं हो सका है। उन्होंने महरुआ स्थित क्रय केंद्र पर धान की बिक्री की थी।
खाद्य एवं विपणन अधिकारी अजित प्रताप सिंह ने बताया कि गत दिवस ही समीक्षा के दौरान सभी एजेंसियों के प्रबंधकों को निर्देशित किया गया था कि बिक्री के तीन दिन के अंदर भुगतान कर दिया जाए। इसका ज्यादातर केंद्रों पर पालन हो भी रहा है। एक हजार किसानों का लगभग सवा करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। संबंधित एजेंसियों के प्रबंधकों को अविलंब भुगतान का निर्देश दिया गया है।