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Ambedkar Nagar News: परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन पर एनएचएआई की अपील से ग्रामीण परेशान

Fri, 09 Jan 2026 11:27 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
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कलेक्ट्रेट में डीएम अनुपम शुक्ला से मिलने के लिए भीटी क्षेत्र के अलग-अलग गांवों के ग्रामीण। - फोटो : मछरेहटा में बोरवेल में गिरकर हिरन की मौत।
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अंबेडकरनगर। अयोध्या में प्रस्तावित 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के संबंध में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में परिसंपत्तियों के पुनर्मूल्यांकन पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई), बस्ती ने मध्यस्थता/डीएम कोर्ट में नई दरें लागू करने की अपील की है। इस अपील के बाद भीटी तहसील क्षेत्र के प्रभावित ग्रामीणों में हलचल मच गई है। डीएम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस के बाद शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। इस प्रकरण में अगली सुनवाई के लिए 16 जनवरी की तारीख तय की गई है।
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राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2271 के निर्माण के लिए 16 अगस्त 2022 को प्रारंभिक अधिसूचना जारी की गई थी। यह 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का हिस्सा भी है। इस मार्ग के भूमि अधिग्रहण के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा 28 फरवरी 2023 को राजपत्र में घोषणा प्रकाशित की गई। 04 अप्रैल 2023 को एक आदेश पारित कर अधिग्रहीत भूमि के लिए मुआवजा निर्धारित किया गया था और सक्षम प्राधिकारी द्वारा 08 मई 2024 को अंतिम अवार्ड पारित किया गया। ग्राम कंदरियावां, नोकरापुर, राजपाल धरौवा, राजपाल सोनवा और उंजिपारा के ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण से संबंधित कुछ परिसंपत्तियों, जैसे हैंडपंप, बोरिंग, बाउंड्रीवॉल आदि को प्रतिकर निर्धारण में शामिल न किए जाने की शिकायतें की थीं। डीएम अंबेडकरनगर के निर्देश पर परिसंपत्तियों के पुनर्मापन से संबंधित प्रस्ताव की जांच लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन प्रांतीय खंड से कराई गई। जांच में मूल्यांकन को सही पाया गया। हालांकि, इस पुनर्मूल्यांकन के कारण, पूर्व में मूल्यांकित की गई कुल राशि 1.68 करोड़ रुपये से घटकर 1.36 करोड़ रुपये हो गई है।


50 लोगों को नोटिस जारी
एनएचएआई, बस्ती के सक्षम प्राधिकारी ने अब मध्यस्थता कोर्ट/डीएम अंबेडकरनगर से कुल राशि को संशोधित करने की अपील की है। इस मामले में डीएम द्वारा लगभग 50 लोगों को नोटिस जारी किया गया है। कंदरियावां के मनीराम प्रजापति और इंदल तिवारी जैसे ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे की राशि का कम किया जाना गलत है और वे कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करेंगे। ग्रामीणों की चिंता यह है कि इस पुनर्मूल्यांकन और नई दरों के लागू होने से उन्हें मिलने वाले मुआवजे की राशि और कम हो सकती है।
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