अंबेडकरनगर। बदलती जीवनशैली का असर अब खिलाड़ियों पर भी पड़ने लगा है। कुश्ती, कबड्डी और हाॅकी की तरह ही बेटियों का रुझान ताइक्वांडो की तरफ भी बढ़ा है। इस खेल विधा से उन्हें न सिर्फ उन्हें एक बेहतर मंच मिल रहा है, बल्कि आत्मरक्षा का हुनर भी सीख रही हैं।
यही वजह है कि पिछले साल की अपेक्षा इस खेल सत्र में उनकी संख्या बढ़ी है। पिछले जहां जिला मुख्यालय में 250 के आसपास बेटियां इसका प्रशिक्षण लेती थीं वहीं इस बार बालिकाओं की संख्या 400 के करीब तक पहुंच गई है। अकबरपुर नगर में तीन स्थानों पर निजी संस्थानों की ओर से ताइक्वांडों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
इस समय यहां की हालत यह है कि पहले जहां बच्चों की संख्या अधिक रहती थी वहीं अब यहां पर बच्चियों का दबदबा है। दिलचस्प यह है कि यहां कि बेटियां अपने प्रदर्शन के दम देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। हाल ही में गोरखपुर में हुई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में यहां कह बेटियों ने गोल्ड से लेकर कई कांस्य पदक अपने नाम किए थे। प्रशिक्षक रविंद्र राजभर ने बताया कि हर वर्ष इनकी संख्या भी बढ़ रही है। इसमें उनके परिवार के लोगों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। (संवाद)