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जन औषधि केंद्र पर तार-तार हो रहीं मरीजों की उम्मीदें, तमाम दवाओं का टोटा

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फोटो 18, अंबेडकरनगर जिला अस्पताल में स्थापित ने जन औषधि केन्द्र पर नहीं मौजूद हैं पर्याप्त दवाएं। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना का जिले में कोई पुरसाहाल नहीं है। एक तरफ जहां योजना के तहत मरीजों का ठीक से उपचार नहीं हो पा रहा है, वहीं मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल में खोले गए जन औषधि केंद्र में कई महत्वपूर्ण दवाओं का टोटा है। इनमें सबसे प्रमुख बीमारी शुगर, थाइराइड के साथ ही आंख व पेट रोग की दवाएं भी शामिल हैं। बच्चों को खांसी, जुकाम, बुखार व एलर्जी आदि से राहत दिलाने के लिए कई तरह की सीरप भी नदारद है। यह दवाएं लगभग एक पखवारे से यहां उपलब्ध नहीं है। नतीजा यह है कि मरीजों को ऐसी तमाम दवाएं बाहर से खरीदने को विवश होना पड़ रहा है।
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मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए लगभग दो वर्ष पूर्व जिले में प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना की शुरुआत हुई। मरीजों को इससे काफी उम्मीद बंधी। योजना के तहत एक परिवार के सभी सदस्यों को प्रत्येक वर्ष अधिकतम 5 लाख रुपये इलाज की सुविधा प्रदान की गई। यह बात अलग है कि कुल 8 लाख 24 हजार 345 लाभार्थियों में से पिछले दो वर्ष में सिर्फ 3620 मरीजों का ही उपचार योजना के तहत हो पाया है। योजना को लेकर विभागीय अफसरों व कर्मचारियों की ढिलाई यहीं तक सीमित नहीं है। योजना का लाभ आम मरीजों को दिलाने के लिए जिला अस्पताल में जो जन औषधि केंद्र काफी जोरशोर से खोला गया था, उसका भी कोई खास लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। इसका एक बड़ा कारण जहां जन औषधि केंद्र को लेकर व्यापक प्रचार प्रयास का अभाव है, वहीं दवाओं का टोटा भी इसमें आड़े आ रहा है।
अमर उजाला टीम ने गुरुवार को जिला अस्पताल पहुंचकर जन औषधि केंद्र का जायजा लिया। वहां उस समय कई मरीज दवा लेने के लिए पहुंचे हुए थे। हालांकि कई मरीजों को उनकी उम्मीद के अनुरूप दवाएं नहीं मिल पाईं। नतीजा यह हुआ कि मरीजों को बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दर पर दवाएं लेने को विवश होना पड़ा। राबीबहाउद्दीनपुर के रवींद्र पाण्डेय ने कहा कि थाइराइड की दवा यहां नहीं थी। चार अन्य दवाएं यहां मिल गईं, लेकिन थाइराइड के लिए निजी मेडिकल स्टोर जाना पड़ रहा। कटुई सम्मनपुर से आई मरीज शकुंतला ने बताया कि शुगर की दवा नहीं मिल पाई। अब निजी मेडिकल स्टोर से महंगे दर से खरीदने की मजबूरी है।
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जन औषधि केंद्र की स्थापना इसलिए की गई थी, जिससे मरीजों को महत्वपूर्ण दवाएं अत्यंत सस्ते दर पर उपलब्ध हो जाएं। जो दवाएं जिला अस्पताल के मुख्य औषधि काउंटर पर नहीं मिल पातीं वह दवाएं यहां उपलब्ध कराने का इंतजाम है। मरीज निजी मेडिकल स्टोरों पर जाकर महंगी दवाएं खरीदने से बच सकें, इसके लिए यहां पर काफी सस्ते दर पर दवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। जन औषधि केंद्र की कर्मचारी ममता व रवि ने बताया कि यहां दवाएं निजी मेडिकल स्टोरों से 60 फीसद तक सस्ती मिल जाती हैं।
जन औषधि केंद्र में शुगर की गेट फार्मिन 500, गिलिपराइट 2, नेत्र रोग के लिए कार्बोक्सिल मिथइल सेलुलोज व सिफ्रो प्लाक्सिन के साथ ही बच्चों के लिए आई ड्रॉप नहीं है। बच्चों में सर्दी व एलर्जी आदि रोग के लिए सिट्रिजिन, पैरासिटामॉल सीरप, एंटी बायोटिक सी फ्रैक्सिन, खांसी की टरबूटालिन, हड्डी रोग के लिए कैल्शियम नहीं है। अन्य दवाओं में जन औषधि बावन बीटा पाउडर, दर्द व बुखार रोग की स्लोफिन, दर्द की सेरोसिओ पेप्टीडेस, थायराइड की दवा वैरक्सिन अनुपलब्ध है। बताया जाता है कि ये दवाएं लगभग एक पखवारे से यहां नहीं हैं।
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जन औषधि केंद्र पर दवाएं खत्म होने पर सीधे संबंधित एजेंसी को मेल भेज दिया जाता है। मेल भेजा गया है। जल्द ही दवाएं उपलब्ध हो जाएंगी।
- डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ
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