अंबेडकरनगर। गर्मी का सीजन शुरू होते ही जिले में आग लगने की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। आग की चपेट में आकर हर साल करोड़ों की संपत्ति जल कर राख हो जाती है। इसके बावजूद जिले में आग बुझाने की जिम्मेदारी निभाने वाला अग्निशमन विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। आलम यह है कि एफएसओ के 4 पदों की तुलना में एक पद पर भी तैनाती नहीं है, जबकि एफएसएसओ के सभी 8 पदों पर तैनाती नहीं हो सकी है।
चालक के 10 पद सृजित हैं, जिसकी तुलना में मात्र 4 पदों पर ही चालकों की तैनाती है। इसके अलावा एसएसआई व फायरमैन के भी सभी पदों पर तैनाती नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं, आग पर काबू पाने को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भीटी तहसील क्षेत्र में चार वर्ष के बाद भी भवन का निर्माण नहीं हो सका है। भवन निर्माण के लिए भूमि का चिह्नांकन तो कर लिया गया, लेकिन बजट के अभाव में भवन का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है।
जिले में कहीं भी आग लगने की दशा में उस पर काबू पाने की जिम्मेदारी जिस अग्निशमन विभाग पर है, वह स्वयं मौजूदा समय में मैन पावर की कमी से जूझ रहा है। लंबे समय से रिक्त चल रहे पदों पर तैनाती की मांग शासन से समय-समय पर की जाती रही है, लेकिन इसे लेकर जिम्मेदारों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। नतीजा यह है कि आग लगने की दशा में उस पर काबू पाने के लिए अग्निशमन विभाग को विभिन्न प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बताते चलें कि अकबरपुर, जलालपुर, आलापुर व टांडा में फायर स्टेशन संचालित हैं। इन स्टेशनों पर कर्मचारियों की कितनी कमी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एफएसओ के कुल 4 पद हैं, लेकिन एक भी पद पर तैनाती है।
इसके अलावा एफएसएसओ के कुल 8 पद सृजित हैं। सभी पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। फायर स्टेशनों पर वाहन तो पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन उनको चलाने वाले चालकों का टोटा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चालकों के कुल 10 पद हैं। इनकी तुलना में मात्र 4 पद पर ही चालकों की तैनाती है। ऐसे में प्रत्येक फायर स्टेशन पर मात्र एक-एक चालक की ही तैनाती है। एसएसआई के 10 सृजित पदों की तुलना में मात्र 4 पदों पर ही तैनाती है, जबकि फायरमैन के 69 पदों की तुलना में 50 पदों पर ही तैनाती है। 19 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। यह जरूर है कि प्रत्येक फायर स्टेशन पर 10-10 होमगार्ड की तैनाती की गई है।
चार वर्ष बाद भी भीटी में नहीं बन सका फायर स्टेशन
आग से राहत दिलाने को लेकर जिम्मेदार कितने गंभीर हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भीटी तहसील क्षेत्र में अब तक फायर स्टेशन की स्थापना नहीं की जा सकी है। वर्ष 2018 में भीटी तहसील मुख्यालय के बगल ही भवन निर्माण के लिए भूमि का चिह्नांकन किया गया था। शासन से बजट न मिलने पर अब तक भवन का निर्माण नहीं हो सका है। इसके अलावा टांडा में फायर स्टेशन तो है, लेकिन उसे अपना भवन नहीं नसीब हो सका है। मौजूदा समय में नगर पालिका के सिटी कंट्रोल रूम में फायर स्टेशन का संचालन हो रहा है। सिर्फ अकबरपुर, जलालपुर व आलापुर में ही संचालित फायर स्टेशन अपने भवन में संचालित हैं।
बरतें यह सावधानियां
अग्निशमन विभाग के अभिषेक सिंह ने कहा कि तनिक सी सावधानी बरतकर आग की घटना पर अंकुश पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि खेत में गेहूं की कटाई करते समय बीड़ी व सिगरेट का प्रयोग कतई न करें। घरों में कूड़ा एकत्र न होने दें। रात को सोते समय रसोई गैस सिलेंडर के रेगुलेटर को बंद जरूर करें। माचिस को छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रखें। होटलों व बड़े भवनों में वायरिंग को समय-समय पर दुरुस्त कराते रहें। जिन संस्थानों पर अग्निशमन यंत्र न हो, वे उसे जरूर लगवा लें।
तैनाती के लिए भेजा गया पत्र
फायर स्टेशनों पर मैन पावर की कमी जरूर है, लेकिन इसके बाद भी बेहतर प्रदर्शन किया जा रहा है। विगत वर्ष 6 करोड़ रुपये की संपत्ति में आग लगी थी। साढ़े 4 करोड़ रुपये की राशि को बचा लिया गया। मात्र डेढ़ करोड़ रुपये की ही राशि जली थी। जो पद रिक्त हैं, उन पर तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
-प्रदीप कुमार चौबे, मुख्य अग्निशमन अधिकारी