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वकीलों ने तहसीलदार कोर्ट का किया बहिष्कार

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भीटी। न्यायालय संचालन को लेकर भीटी तहसील के अधिवक्ताओं व तहसीलदार के बीच सीधी जंग छिड़ गई है। बार एसोसिएशन ने तहसीलदार न्यायालय का बहिष्कार करने का एलान कर दिया है। साथ ही उनके स्थानांतरण की मांग शुरू कर दी है। वकीलों ने कहा कि उनके कार्य एवं व्यवहार से अधिवक्ताओं में आक्रोश है। ऐसे में उनके यहां रहते न्यायालय का सुचारु संचालन हो पाना और पीड़ितों को न्याय मिल पाना संभव नहीं है। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिवक्ता उनके न्यायालय में पाया जाएगा है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। उधर, तहसीलदार ने न्यायालय संचालन में अधिवक्ताओं पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है।
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भीटी तहसील के अधिवक्ताओं व तहसीलदार में तकरार बढ़ गई है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि तहसीलदार बार के तमाम प्रस्तावों को नकारते हुए न्यायालय का संचालन करते हुए एक पक्षीय कार्रवाई कर रहे हैं। इसे लेकर कई बार आपत्ति जतायी गई, लेकिन इसके बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे अधिवक्ताओं में नाराजगी है। अध्यक्ष हरीश कुमार मिश्र की अध्यक्षता में शुक्रवार को अधिवक्ताओं की बैठक हुई। इसमें अधिवक्ताओं ने तहसीलदार के रवैये को लेकर नाराजगी जाहिर की। कहा कि उनके यहां रहते पीड़ितों को न्याय मिल पाना और न्यायालय का सुचारु संचालन हो पाना संभव नहीं है। ऐसे में अविलंब उनका स्थानांतरण सुनिश्चित किया जाए।
अधिवक्ताओं ने बैठक में निर्णय लिया कि जब तक उनका स्थानांतरण नहीं हो जाता, तब तक अधिवक्ता उनके न्यायालय का बहिष्कार करेंगे। साथ ही एसोसिएशन ने अधिवक्ताओं को भी चेतावनी दी कि यदि कोई निर्देशों का उल्लंघन करते हुए उनके न्यायालय में पाया जाएगा है तो उस पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस मौके पर पूर्व बार अध्यक्ष सत्यप्रकाश शुक्ल, मंत्री बजरंग प्रसाद, उदयप्रताप सिंह, राकेश कुमार, कार्तिकेय तिवारी, शिवप्रसाद, राकेश द्विवेदी व रामअनुज आदि मौजूद रहे।
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उधर, तहसीलदार ज्ञानेंद्र यादव ने कहा कि वे शासन की मंशानुरूप काम करने का प्रयास कर रहे हैं। शासन का स्पष्ट निर्देश है कि अधिकाधिक वादों का निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और पीड़ितों को न्याय दिलाया जाए। परंतु अधिवक्ता बेवजह अकसर हड़ताल व शोक प्रस्ताव का हवाला देकर कार्य से विरत रहते हैं। इससे वादकारियों को समय से न्याय दे पाना संभव नहीं हो पाता। उनका प्रयास रहता है कि अधिक से अधिक वादों की सुनवाई और उसका निस्तारण हो। कुछ अधिवक्ताओं को इससे दिक्कत है।
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