अंबेडकरनगर। कृषि कानून के विरोध में राष्ट्रीय किसान मोर्चा, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बहुजन मुक्ति पार्टी, इंडियन लीगल प्रोफेशनल एसोसिएशन, राष्ट्रीय मूल निवासी महिला संघ, बहुजन क्रांति मोर्चा का संयुक्त रूप से कलेक्ट्रेट के पास अनिश्चितकालीन धरना रविवार को भी जारी रहा। इस दौरान पदाधिकारियों ने कहा कि किसानों को कतई पूंजीपतियों का बंधुआ मजदूर नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार को कृषि कानून वापस लेना ही होगा। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून को वापस नहीं लिया गया तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
धरने के दौरान राष्ट्रीय किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष जयप्रकाश ने कहा कि कृषि कानून किसानों के हित में नहीं है। इस कानून से किसान पूंजीपतियों का बंधुआ मजदूर हो जाएगा। खून पसीना बहाकर वह फसल तैयार करेगा, लेकिन उसकी उपज के मूल्य का निर्धारण पूंजीपतियों द्वारा किया जाएगा। कहा कि सरकार ने जो काला कानून किसानों पर थोपा है, उसे वापस लेना ही होगा।
अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि कृषि कानून के विरोध में किसान आवाज बुलंद कर रहे हैं तो उनकी आवाज को बलपूर्वक दबाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार का उत्पीड़न कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार को अपने कदम वापस खींचने ही होंगे। चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही कृषि कानून वापस नहीं लिया गया तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस मौके पर रवि कुमार, सुरेश, मंगलप्रसाद, प्रदीप कुमार, इसरावती, कमलेश, रामसेवक, आदित्य, विनय आदि मौजूद रहे।