ठंड में रात काटना हुआ दुश्वार
नासिरपुर निवासी अमरावती ने बताया कि उसका पति राजितराम मजदूरी करता है। उनके पास सिर छिपाने के लिए पक्का मकान नहीं है। बीते पांच वर्ष से कई बार सरकारी योजना के तहत आवास पाने के लिए आवेदन करने के बाद भी निराशा हाथ लगी है। ऐसे में ठंड में रात काटना दुश्वार बन गया है।
घास फूस के घर में रहने को मजबूर
बरवां निवासी मालती राजभर पति लालमन व दो बच्चों के साथ छप्पर के मकान में रहकर जीवन बसर कर रही हैं। दिहाड़ी मजदूरी से जितने पैसे की कमाई होती है। उससे केवल परिवार का खर्च ही पूरा हो पाता है। पात्रता के बाद भी उन्हें अभी तक सरकारी आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
टिनशेड के नीचे करना पड़ रहा गुजारा
बरवां नासिरपुर निवासी अनुषा ने बताया कि पांच दशक पूर्व बना उसका घर जर्जर हो चुका है। बरसात में छत से पानी टपकता है। मजबूरी में पूरे परिवार को टिनशेड के नीचे गुजर बसर करना पड़ रहा है। पति फूलचंद मजदूरी करते हैं। पक्का मकान पाने के लिए 12 से अधिक बार आवेदन करने के बाद भी अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
अंबेडकरनगर। ये तीन मामले तो बस बानगी भर हैं। ठंड के दौरान सर्द रातें आवासहीन गरीबों की नींद उड़ा रही है। कच्चे व घास फूस से बने मकानों में ठंडी हवा के झोंके रात भर जागने को विवश करते हैं। ऐसे में वर्ष 2024 तक हर आश्रयहीन के सिर पर पक्की छत वायदा भी कागजी साबित होता दिखता है।
पीएम आवास योजना में गरीबों को लाभ देने की जिम्मेदारी नगरीय विकास अभिकरण डूडा को मिली है। योजना की शुरुआत में जिले के 20,125 लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से 194 लोगों के आवेदन पत्र जांच में अपात्र मिलने पर निरस्त कर दिए गए। इनमें से 18,680 पात्रों को मकान बनवाने के लिए तीनों किस्त की धनराशि भी भेज दी गई। इसके बावजूद नगर पालिका अकबरपुर में काफी संख्या में आश्रयहीन परिवार ठंड में पक्का मकान न होने से रातें जागकर काटने की परेशानी उठा रहे हैं।
नई गाइडलाइन से मिलेगा फायदा
प्रधानमंत्री आवास 2.0 योजना जल्दी ही शुरू होने वाली है। इसके बाद शासन के निर्देशानुसार सभी को इसकी जानकारी मुहैया करा कर अब तक आवास पाने से वंचित लोगों से आवेदन लेकर उन्हें आवास आवंटित कराए जाएंगे।
बीना सिंह, प्रभारी परियोजना निदेशक डूडा