नेहरू नगर वार्ड में क्षतिग्रस्त सड़क और गंदगी। संवाद
अंबेडकरनगर। सीमा विस्तार होने के बाद भी 36 गांवों के लोगों का शहर जैसी सुविधा मिलने का सपना 12 साल बाद भी हकीकत में नहीं बदल सका। यह गांव शहर का हिस्सा तो जरूर बने, लेकिन यहां के लोग आज भी देहात क्षेत्र की सुविधा का लाभ पा रहे हैं। न तो 24 घंटे बिजली आती है और न ही चलने के लिए ढंग की सड़कें हैं। इन गांवों में रहने वाली करीब 50 हजार लोग समस्याओं के चलते परेशान हैं।
साल 2008 में नगर पालिका परिषद अकबरपुर का सीमा विस्तार हुआ था। इस सीमा विस्तार के तहत 30 गांव संपूर्ण, जबकि छह गांव आंशिक रूप से जोड़ गए थे। इसका मकसद था कि इन गांवों के लोगों को शहर जैसी सुविधाएं दी जा सकें। इतना लंबा समय गुजरने के बाद भी यहां पर विकास का पहिया दौड़ नहीं सका है।
लोरपुर के रहने वाले सतीश वर्मा कहते हैं कि सोचा था कि विकास के बाद गांव की सूरत बदलेगी लेकिन यहां तो सड़कें तक दुरुस्त नहीं हैं। बिजली भी 24 घंटे तक नहीं मिलती है। कई ऐसे मोहल्ले हैं, जहां पर बिजली के पोल नहीं लगाए गए हैं। पोल न लगने से बांस-बल्ली पर बिजली लाइन खींचनी पड़ रही है।
पक्की नालियां न होने से सड़क पर पानी भरा रहता है। मिर्जापुर के चंद्रकात यादव कहते हैं कि गांव में आज भी शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन टैक्स बराबर वसूला जा रहा है। (संवाद)