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Ambedkar Nagar News: कहीं डॉक्टर नदारद तो कहीं कर्मचारी नहीं

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शहजादपुर में बंद आयुष्मान आरोग्य मंदिर। संवाद
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अंबेडकरनगर। एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराने लगी है। समान कार्य के लिए समान वेतन और नियमितीकरण समेत विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों द्वारा किए जा रहे कार्य बहिष्कार का सीधा असर अब मरीजों पर पड़ रहा है। जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तक सेवाएं प्रभावित होने से लोग इलाज के लिए भटकने को मजबूर हैं।
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सोमवार को स्वास्थ्य केंद्रों की पड़ताल में कहीं डॉक्टर तो कहीं कर्मचारी नदारद मिले। जिससे कई मरीजों को बिना जांच कराए ही वापस लौटना पड़ा, तो कई को दवा के लिए दूसरे केंद्रों के चक्कर काटने पड़े। ग्रामीण अंचलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर ताले लटके रहने से ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार व सामान्य जांच तक नहीं मिल सकी। आपातकालीन सेवाओं के वैकल्पिक इंतजाम के बावजूद नियमित स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। यदि यह हड़ताल लंबी खिंची, तो ग्रामीण क्षेत्रों में इलाज और दवाओं की किल्लत से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

केस: 01
सुबह 11.27 बजे
जिला अस्पताल में हेल्प डेस्क खाली, शुगर-बीपी जांच ठप
जिला अस्पताल में सोमवार को एनएचएम संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर दिखाई दिया। अस्पताल में तैनात 50 से अधिक संविदा कर्मचारियों में से आधे से भी कम ड्यूटी पर पहुंचे। इससे मरीजों की सहायता के लिए बनाई गई हेल्प डेस्क, फिजियोथेरेपी कक्ष और एनसीडी क्लिनिक पर ताले लटके रहे या कर्मचारी नदारद रहे, जिससे मरीजों की बीपी और शुगर की जांच तक नहीं हो सकी। इसी तरह बाल रोग वार्ड में भी स्टाफ की कमी रही। व्यवस्था संभालने के लिए आनन-फानन में एमसीएच (महिला एवं बाल अस्पताल) से कर्मचारियों को बुलाकर ड्यूटी पर लगाया गया और इंटर्नशिप कर रहे प्रशिक्षुओं से काम लेना पड़ा।
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क्या कहते हैं मरीज
जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचीं अकबरपुर के सदरपुर निवासी सुभावती ने बताया कि चिकित्सक को दिखाने के बाद वे बीपी व शुगर की जांच कराने गई थीं। केंद्र पर नियमित कर्मचारियों के अनुपस्थित रहने के कारण प्रशिक्षुओं से जांच करानी पड़ी। इसी तरह केदारनगर के नंदपुर गांव से एमसीएच विंग आईं सुधा ने बताया कि वे महिला चिकित्सक से परामर्श लेने पहुंची थीं, किंतु उनकी अनुपस्थिति के कारण मजबूरी में उन्हें पुरुष चिकित्सक से ही इलाज कराना पड़ा।

केस: 02
आरोग्य मंदिरों पर लटके ताले
हड़ताल का असर शहरी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों पर भी साफ दिखाई दिया। सोमवार को अकबरपुर के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में ताले लटके रहे, जिससे मरीजों को मजबूरन सीएचसी मीरानपुर और जिला अस्पताल का रुख करना पड़ा। वहीं, बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण और इलाज का जिम्मा संभालने वालीं ब्लॉक स्तरीय दोनों आरबीएसके टीमें भी फील्ड में नहीं निकलीं। इसके अलावा, हड़ताल के कारण आशा संगिनी, बीपीएम और अन्य संबंधित कर्मियों की प्रस्तावित बैठकें भी ठप रहीं।
केस: 03
टीकाकरण व स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रभावित
आलापुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर में संविदा चिकित्सकों और कर्मचारियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अस्पताल में बलगम की जांच कराने आईं किस्मती देवी को व्यवस्था न होने के कारण बिना जांच कराए निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष राय और डॉ. सुशील की मौजूदगी में ओपीडी संचालन और दवा वितरण का कार्य सुचारु रूप से जारी है।

संविदा चिकित्सकों के हड़ताल से परेशान हो रहे मरीज
फोटो: 35
बसखारी। सीएचसी बसखारी में डॉक्टर समेत तैनात सभी 62 संविदा कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल में शामिल होने वालों में डॉ. पंकज मिश्र, डॉ. अशफाक और डॉ. दिनेश सिंह भी शामिल हैं। सोमवार को ओपीडी में कुल 716 मरीज आए। बकड़ापुर निवासी मरीज मंगला मिश्र और कोतूपुर निवासी मनोज यादव ने बताया कि डॉक्टरों के न रहने से उन्हें इलाज कराने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा।



वर्जन
हड़ताल को देखते हुए स्थायी कर्मचारियों को सतर्क कर दिया गया है और सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। संविदा कर्मचारियों से लगातार काम पर वापस लौटने की अपील की जा रही है,ऐसा न करने पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। स्थिति के समाधान के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
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- डॉ. प्रमोद कुमार, सीएमओ
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