टांडा में होली मिलन समारोह में विमोचित की जाने वाली गुदगुदी पत्रिका।
विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। बुनकर नगरी टांडा में होली की शाम मिलन समारोह की परंपरा लगातार 60 वर्षों से चली आ रही है। इस मौके पर रंगमंच से कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसे देखने व सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसमें ससम्मान तीन प्रमुख उपाधियां भी दी जाती हैं और गुदगुदी पत्रिका का विमोचन भी होता है।
गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाने वाले टांडा नगर में होली की शाम पुराने रामलीला मैदान पर भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन होता है, जिसमें दोनों धर्म संप्रदाय के लोग आपस में गले मिलकर बधाई देते हैं। नगर के प्रतिष्ठित सेठ स्व. काशी प्रसाद खेमानी ने वर्ष 1965 में इसकी शुरुआत की थी। शुरुआती दिनों में कार्यक्रम के आयोजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। धीरे-धीरे कार्यक्रम का विस्तारण किया गया। लोगों के लिए मनोरंजन कार्यक्रमों से लेकर सम्मान समारोह का भी आयोजन शुरू हुआ।
प्रतिष्ठित लोगों को महाघाघ, मूर्खाधिराज तथा महामूर्ख की उपाधि से नवाजे जाने की परंपरा ने लोगों को आकर्षित करना शुरू किया। उपाधि से विभूषित कर करके तीनों को मुकुट पहनाया जाता है हास्य-व्यंग्य के चलते लोगों ने चौक घंटाघर से लेकर आर्य कन्या स्कूल तक जाने मार्ग का नाम भी बदल दिया गया। इस कार्यक्रम में मुस्लिम संप्रदाय के लोग भी बढ़-चढ़कर सहयोग करते हैं। इस सामाजिक विरासत को ईश्वर दयाल जायसवाल बखूबी निभा रहे हैं। वह बताते हैं कि परंपरा का निर्वहन टांडा में दशकों से होता चला आ रहा है। (संवाद)
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ये हैं प्रमुख उपाधियां
गिटगिटान विभाग यानी (राजनेता और पिछलग्गू नेता ), कुशासन विभाग (प्रशासनिक अमला), लूट-खसोट विभाग (नगर पालिका), बैठ-ठाले विभाग (कवि, शायर, समाजसेवी), जमाखोर विभाग(बैंक), झगड़ा लगाओ विभाग (अधिवक्ता), चुगलखोर विभाग (पत्रकार),नलेवा विभाग (चिकित्सक), जाहिल जाट विभाग (शैक्षिक) के साथ मतलबी-खुन्नसी नगरवासी की उपाधि भी दी जाती है।