अभी इक्का दुक्का किसानों द्वारा ही प्रत्येक गांव में कटाई का कार्य किया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में इसके और तेज होने की उम्मीद है। मौसम के प्रतिकूल रुख को देखते हुए ही शासन ने इस बार धान की खरीद का कार्य अक्तूबर की बजाए एक नवंबर से शुरू करने का निर्णय लिया है।
धान उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी जनपदों में शुमार अंबेडकरनगर के धान किसानों को इस बार भी प्रकृति का साथ नहीं मिल सका। गेहूूं की फसल के दौरान भी प्रकृति ने किसानों को करारी चोट दी थी, तो उससे उबरने की उम्मीद किसानों ने धान की फसल को लेकर लगा रखी थी।
शुुरू में तो ऐसे माहौल बन गए थे कि किसानों को धान की रोपाई कर पाना ही कठिन लग रहा था। जैसे तैसे किसानों ने धान की रोपाई तो कर ली, लेकिन उसके बाद भी उनका संकट बना रहा। सिंचाई के लिए पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही थी। साधन संपन्न किसानों ने तो किसी तरह व्यवस्था कर भी लिया, लेकिन अन्य किसानों के लिए सिंचाई का संकट अंत तक बना रहा।
प्रकृति की मार को देखते हुए इस बीच शासन ने भी तय किया कि धान की खरीद का काम इस बार एक माह विलंब से किया जाएगा। अब 1 नवंबर से धान की खरीद होनी है, जबकि बीते वर्षों में यह कार्य एक अक्तूबर से होता था। शासन का यह निर्णय अधिकांश किसानों के लिए तो फायदेमंद ही प्रतीत हो रहा, लेकिन जिन किसानों ने अगेती फसल लगाई थी, उनके सामने थोड़ी मुश्किल जरूर है।
सरकारी क्रय केन्द्र न खुलने के बीच अभी इक्का दुक्का आढ़तों पर ही धान की खरीद का काम शुरू हो पाया है। किसान रामराज व रमाकांत कहते हैं कि अगेती धान की पैदावार शुरू हो गई है, लेकिन लागत निकलना मुश्किल हो रहा है। किसान आत्माराम व लौटू के मुताबिक रोपाई से लेकर पैदावार तक काफी रुपया खर्च हो चुका है।
शासन से खरीद न शुरु होने के चलते आढ़ती भी मनमाने तरीके से धान की खरीद कर रहे हैं। काफी कोशिश के बाद भी 1100 रुपए प्रतिकुंतल धान नहीं बिक पा रहा है। आढ़ती प्रमोद पांडेय ने बताया कि अभी धान की आमद नहीं है। इसलिए खरीद का काम ो हीं हो रहा।
जिन चंद किसानों की फसल तैयार भी हुई है, वह स्थानीय स्तर पर ही उसकी बिक्री कर ले रहे हैं। उधर जिलाधिकारी विवेक ने कहा कि किसानों के धान की खरीद 1 नवंबर से प्रभावी ढंग से शुरू कराई जाएगी। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।