अंबेडकरनगर। रसायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग के कारण मिट्टी की उर्वरता शक्ति तेजी से घट रही है। पीएच में कमी आ रही है। इसमें कमी लाने के लिए ढैंचा सबसे बेहतर विकल्प है। जिले में 355 क्विंटल ढैंचा बीज का आवंटन किया गया है। इसमें 40 क्विंटल बीज प्रदर्शन के लिए चयनित किसानों को दिया जाएगा।
रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है। ऐसे में किसान इस समय हरी खाद का प्रयोग करके अच्छा उत्पादन पा सकते हैं। इसके साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाई जा सकती है। जिला कृषि अधिकारी विनय सिंह ने कहा कि रबी की फसल कट चुकी है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका है कि खेत में हरी खाद का प्रयोग करें। हरी खाद का प्रयोग मिट्टी में पोषक तत्वों को बढ़ाने और उसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति करने के लिए की जाती है।
इससे खेत को नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, जस्ता, तांबा, मैगनीज, लोहा, मोलिब्डेनम आदि तत्व भी मिलते हैं। इसके अलावा खेत में कार्बनिक पदार्थ की मात्रा बढ़ाकर उसकी भौतिक दशा को सुधारा जा सकता है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए मई में सनई, ढैंचा, मूंग, लोबिया में से किसी की बोआई करना बेहतर है।
जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय ने बताया कि जल्द ही 355 क्विंटल ढैंचा का बीज जनपद में आ जाएगा। 40 क्विंटल ढैंचा का बीज प्रदर्शन के लिए आवंटित है। चयनित किसानों में इस मुफ्त में वितरण किया जाएगा, वहीं सामान्य वितरण के तहत 50 प्रतिशत अनुदान पर बीज वितरित किया जाएगा। बताया कि एक किलो ढैंचा के बीज का मूल्य 115.85 रुपये है। इसमें 50 प्रतिशत अनुदान काटकर किसानों को भुगतान करना है।
ऐसे करें बोआई-
खाली खेत में हल्की सिंचाई करके 45-50 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से ढैंचा के बीज की बोआई करते हैं। फसल जब लगभग 45-50 दिन की हो जाती है। इससे धान की रोपाई से पूर्व हरी खाद के साथ खेत खरीफ फसल की बोआई के लिए तैयार हो जाती है। ढैंचा के अंदर कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी तरह से उगने की शक्ति होती।