अंबेडकरनगर। किसान आंदोलन और पेगासस जासूसी मामले को लेकर केंद्र सरकार का रवैया चिंताजनक है। यह विचार बसपा संसदीय दल के नेता रितेश पांडेय ने शनिवार को अमर उजाला से दूरभाष पर बात करते हुए प्रकट किए। कहा कि सांसदों के प्रतिनिधि मंडल ने राष्ट्रपति से मिलकर इस मामले में अपनी आपत्ति जताई है। कहा गया कि किसानों की उपेक्षा करना अत्यंत दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है।
बसपा संसदीय दल के नेता रितेश पांडेय ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि किसान अपने हक की मांग को लेकर लगातार आंदोलनरत हैं। केंद्र व प्रदेश सरकार उनके हक को समझने व पूरा करने की बजाए उनका उत्पीड़न कर रही है। किसानों को नीचा दिखाने की कोई कोशिश सरकार व सत्तारूढ़ दल की तरफ से नहीं छोड़ी जा रही है। किसान किसी एक पार्टी का नहीं है। वह सभी दल में है। वे देश की जान व देश की शान हैं। उन पर लाठी चलवाना, कभी उन्हें आतंकी तो कभी उन्हें मवाली कहना ठीक नहीं है। सांसद ने कहा कि आंदोलन में अब तक साढ़े पांच सौ से अधिक किसानों की जान जा चुकी है। इसके बाद भी सरकार हठधर्मिता कर रही है। किसानों से लड़ाई सरकार के लिए शोभनीय नहीं है।
देश का पेट पालने वाले किसान को नीचा दिखाकर सरकार को कोई जीत हासिल होने वाली नहीं है। सांसद ने पेगासस जासूसी मामले में सरकार के रवैये को चिंताजनक बताते हुए कहा कि सरकार सदन में चर्चा से पीछे क्यों हट रही है। सरकार की नीयत साफ है तो उसे खुले मन से आगे आना चाहिए। जांच व चर्चा से पीछे हटकर सरकार यह साबित कर रही है कि उसने सब कुछ जान बूझकर किया है।
जासूसी का मामला न सिर्फ असंवैधानिक है, वरन यह निजता के अधिकारों का उल्लंघन भी है। राष्ट्रपति से मांग करते हुए कहा कि इस मामले में सरकार को निर्देशित किया जाए। सांसद ने बताया कि सांसद रामशिरोमणि वर्मा, सुप्रिया सुले, मलूक नागर, हरमिंदर कौर व सुखवीर सिंह बादल आदि ने राष्ट्रपति से मिलकर पेगासस जासूसी मामले की जांच कराने तथा किसानों की मांगों को पूरा कराए जाने की मांग की।