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लापरवाही बरतने पर एडीओ समेत चार कर्मी निलंबित

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राजेसुल्तानपुर/जहांगीरगंज (अंबेडकरनगर)। दिनदहाड़े दो सगे भाइयों की हत्या मामले में लापरवाही पाए जाने पर गुरुवार को डीएम राकेश कुमार मिश्र ने एडीओ पंचायत व दो सेक्रेटरी समेत एक लेखपाल को निलंबित कर दिया। बड़ा सवाल अभी भी यह कि लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर तो गाज गिर गई, लेकिन वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी आखिर कब पुलिस के शिकंजे में आएंगे। जिन कर्मचारियों को गुरुवार को निलंबित किया गया, उनमें लेखपाल पर मनमाने ढंग से निवास प्रमाणपत्र जारी कर देने तथा अन्य तीन कर्मियों पर परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने तथा काटने की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने का आरोप है।
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बीते सोमवार को दिनदहाड़े मल्लूपुर मजगवां गांव में पूर्व प्रधान प्रतिनिधि अनिल मिश्र व उनके बड़े भाई सेवानिवृत्त फौजी सुरेंद्र मिश्र की पंचायत चुनाव की रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वारदात के बाद से ही सिर्फ अमर उजाला ने इन तथ्यों को सार्वजनिक किया कि पंचायत चुनाव के ठीक पहले हत्या के आरोपी अमित सिंह का नाम मनमाने ढंग से उसके मूल गांव बनकटा बुुजुर्ग के परिवार रजिस्टर से काटकर एक अस्थायी निर्माण के आधार पर नियम विरुद्घ ढंग से मल्लूपुर मजगवां ग्राम पंचायत के परिवार रजिस्टर में जोड़ दिया गया। इसी के बाद अमित सिंह मल्लूपुर मजगवां गांव की मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाना चाह रहा था, जिसका अनिल मिश्र व परिवारीजनों की ओर से विरोध किया जा रहा था।
सिर्फ अमर उजाला ने यह तथ्य उठाया कि जब अमित बनकटा बुजुर्ग स्थित अपने पक्के मकान में ही रहता आ रहा था तो एक नितांत अस्थायी निर्माण को ही उसका घर कैसे मान लिया गया। कोई व्यक्ति अपने पक्के व तमाम सुविधायुक्त आलीशान घर को छोड़कर बगल के गांव स्थित एक भूखंड पर सिर्फ टिनशेड में कैसे दिन-रात रह सकता है। परिवार रजिस्टर से नाम काटते व जोड़ते समय इस तथ्य का ध्यान पंचायत कर्मचारियों ने नहीं रखा। अमर उजाला ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद डीएम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी। सीडीओ घनश्याम मीणा, एसडीएम आलापुर धीरेंद्र श्रीवास्तव व डीपीआरओ शेषदेव पांडेय की कमेटी ने 24 घंटे के भीतर ही तेजी से जांच पूरी कर ली।
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जांच समिति की रिपोर्ट आते ही डीएम राकेश कुमार मिश्र ने तत्कालीन प्रभारी सहायक विकास अधिकारी पंचायत अजय कुमार मौर्य, ग्राम पंचायत बनकटा बुजुर्ग के सेक्रेटरी उपेंद्र कुमार सिंह तथा मल्लूपुर मजगवां के सेक्रेटरी अंकुर शर्मा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही आरोपी अमित व उसकी पत्नी श्रेया के नाम से निवास प्रमाणपत्र जारी करने वाले लेखपाल श्रीराम को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। पंचायत कर्मियों के निलंबन का आदेश बाद में डीपीआरओ तथा लेखपाल के निलंबन का आदेश एसडीएम आलापुर ने जारी कर दिया। इस बीच क्षेत्र में बड़ा सवाल यह बनकर उभरा है कि दोहरे हत्याकांड में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर तो गाज गिर गई, लेकिन वारदात को अंजाम देने वाले अपराधी आखिर कब पुलिस के शिकंजे में आएंगे। वारदात के तीन दिन बाद तक छह नामजद आरोपियों में से एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सभी नामजद बदमाशों की गिरफ्तारी जल्द तय करने की जरूरत है। इसमें यदि एसटीएफ का भी सहयोग लेना पड़े तो लिया जाए।
बीडीओ की भूमिका को लेकर प्रशासन मौन
एक गांव के परिवार रजिस्टर से नाम काटने तथा दूसरे गांव के परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने में मनमानी बरतने तथा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले कर्मचारियों को तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन इस पूरे प्रकरण में जहांगीरगंज के खंड विकास अधिकारी की भूमिका को लेकर प्रशासन मौन है। यह हाल तब है, जबकि पूरा प्रकरण पिछले तीन माह से लगातार चर्चा में है। दोनों ही पक्ष लगातार ब्लॉक कार्यालय से लेकर कर्मचारियों तक के चक्कर लगाते आ रहे थे। इसके बावजूद बीडीओ आरके चौरसिया ने इस मामले में हस्तक्षेप करने तथा गड़बड़ी को रोकने की जरूरत नहीं महसूस की। बताया जाता है कि जब बनकटा बुजुर्ग के परिवार रजिस्टर से मनमाने ढंग से अमित सिंह व उनकी पत्नी श्रेया का नाम काटा गया तो उसके तत्काल बाद अनिल मिश्र ने बीडीओ से मिलकर आपत्ति की थी। उन्होंने तत्कालीन एडीओ पंचायत अजय मौर्य से भी मुलाकात कर कहा था कि नियमों का उल्लंघन हो रहा है। अब इसी मामले में एडीओ पंचायत व अन्य कर्मियों को तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन बीडीओ की भूमिका तय न करने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि कर्मचारियों को तो आसानी से नाप दिया गया, लेकिन अफसरों की भूमिका तय करने में न्याय नहीं हो रहा। ग्रामीणों के अनुसार बीडीओ जहांगीरगंज भी लापरवाही बरतने के दोषी हैं। उनका अनुश्रवण ठीक नहीं रहा। ऐसे में उनके विरुद्घ भी तत्काल कार्रवाई कर प्रशासन को पूरी तरह से निष्पक्षता दिखानी चाहिए।
निलंबित कर्मियों पर दर्ज हो आपराधिक साजिश का केस
निलंबित हुए कर्मचारियों के विरुद्घ अब आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज करने की आवाज उठने लगी है। गुरुवार को दिवंगत अनिल मिश्र के घर पहुंचे कई नागरिकों ने कहा कि सिर्फ निलंबन ही पर्याप्त नहीं है। पंचायत कर्मियों ने यदि मनमाने ढंग से बनकटा बुजुर्ग के परिवार रजिस्टर से हत्या के आरोपी अमित सिंह का नाम न काटा होता तो वह मल्लूपुर मजगवां ग्राम पंचायत का मतदाता बनने के लिए कोशिश न करता। इससे चुनाव को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी न होती। नागरिकों ने कहा कि इसके चलते ही यह तय है कि दोहरे हत्याकांड की नींव पंचायत कर्मियों की इसी मनमानी व नियमों की अनदेखी के चलते रखी गई। ऐसे में न्यायपूर्ण यही है कि सभी दोषी पंचायत कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाया जाए। पीड़ित के घर मौजूद नागरिकों ने कहा कि पंचायत कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से अच्छा संदेश जाएगा। अन्य जगहों पर भी इस तरह की मनमानी रुकेगी और अनायास होने वाली अनहोनी रोकी जा सकेेगी।
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