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पूर्व मंत्री राममूर्ति के रुख ने सपा के घमासान को दिया विराम

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अंबेडकरनगर। विधानसभा चुनाव में अकबरपुर सीट पर मचे घमासान को निपटाने में सपा को अंतत: कामयाबी मिलती दिख रही है। लंबे समय से बगावत की तमाम खबरों व पुरजोर अटकलों को खारिज करते हुए पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा ने गुरुवार को अमर उजाला से कहा कि वे पार्टी के वफादार सिपाही हैं। मूल सीट से टिकट मांगना किसी भी पार्टी कार्यकर्ता व नेता का हक है। लेकिन पार्टी नेतृत्व जो बेहतर समझेगा, वह प्रत्येक निर्णय मुझे मान्य है। उनका यह बयान निश्चित रूप से पार्टी में बिखराव की आशंका को लेकर बेचैन कार्यकर्ताओं व नेताओं के लिए राहत की खबर लेकर आया है। अब यह तय माना जा रहा है कि बसपा से सपा में आए अकबरपुर के मौजूदा विधायक पूर्व मंत्री रामअचल राजभर को सपा नेतृत्व अकबरपुर से चुनाव लड़ाएगा, जबकि पूर्व मंत्री राममूर्ति वर्मा आजमगढ़ की सगड़ी विधानसभा सीट से प्रत्याशी होंगे।
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विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के पहले से ही अकबरपुर सीट पर टिकट को लेकर सपा में घमासान मचा हुआ है। दरअसल इस सीट से मौजूदा विधायक रामअचल राजभर सपा में शामिल हो गए हैं। वे वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे। कटेहरी से बसपा के टिकट पर चुने गए लालजी वर्मा के साथ ही रामअचल भी बीते दिनों सपा के साथ हो गए थे। इसके बाद से ही अकबरपुर में टिकट को लेकर सपा में रार मची हुई थी।
सिटिंग विधायक होने के चलते तथा बसपा में राष्ट्रीय महासचिव व प्रदेश अध्यक्ष जैसा बड़ा पद संभाल चुके रामअचल अकबरपुर सीट से अपनी दावेदारी जताते हुए सपा में शामिल हुए थे। उधर, 2012 में अकबरपुर से विधायक तथा तत्कालीन सपा सरकार में दुग्ध विकास मंत्री रहे राममूर्ति वर्मा ने भी अपनी दावेदारी बरकरार रखी। वे 2017 में रामअचल के हाथों पराजय के बाद से लगातार क्षेत्र में कार्य करते आ रहे थे। संगठन की मजबूती से लेकर कार्यकर्ताओं के बीच लगातार पैठ बनाए रखने के चलते उन्हें अपने टिकट को लेकर कोई खतरा नहीं था। पार्टी का बड़ा नेता होने के कारण वे दूसरों को टिकट दिलाने में दखल देते रहते थे। हालांकि रामअचल के सपा में शामिल होने के बाद से अचानक स्थितियां बदल गईं।
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पूर्व मंत्री राममूर्ति ने अपना जनसंपर्क अभियान पहले की ही तरह जारी रखा। इससे टकराव की गूंज सुनाई पड़ने लगी। पूर्व मंत्री ने तो सीधे तौर पर कोई चुनौती नहीं दी, लेकिन कई कार्यकर्ता कहते दिखे कि अकबरपुर से राममूर्ति को टिकट न मिला तो बगावत संभव हो सकती है। समय बीतने के साथ दोनो खेमों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। एक-दूसरे के पोस्टर व बैनर से दोनों बड़े नेता गायब रहे। इन सबसे स्थितियां और खराब होती रहीं। समय के साथ ही राममूर्ति के कभी भाजपा में जाने तो कभी अपना दल के सहारे चुनाव लड़ने की अटकलें सामने आती रहीं। इन सबके बीच अब राममूर्ति ने पार्टी के लिए राहत वाली खबर दी है। गुरुवार को अमर उजाला से खास बातचीत में राममूर्ति ने कहा कि मैं पार्टी का वफादार सिपाही हूं। पार्टी नेतृत्व ने हल खोज लिया है। हम दोनों में से कोई एक अकबरपुर से चुनाव लड़ेगा, जबकि दूसरा जिले के बाहर किसी सीट से।
भाजपा से मेल नहीं खाती विचारधारा
पूर्व मंत्री राममूर्ति ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी में जाने की खबरें सिर्फ अफवाह हैं। मेरी विचारधारा ही भाजपा से मेल नहीं खाती। हम समाजवादी लोग हैं। काम करने और संघर्ष करने में विश्वास रखते हैं। मेरे पास तमाम दलों से ऑफर आए, लेकिन मुझे अपने नेतृत्व व अपने कार्यकर्ताओं पर पूरा भरोसा है और उन्हीं से पूरा लगाव है। मैं किसी और दल में नहीं जा रहा हूं। पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हूं। उनकी ओर से मेरे व कार्यकर्ताओं के मान सम्मान का भरोसा दिलाया गया है। मैं प्रत्येक कार्यकर्ता का मान सम्मान सदैव बरकरार रखूंगा।
तय हुआ यह फार्मूला
सूत्रों के अनुसार अकबरपुर सीट से मौजूदा विधायक रामअचल राजभर को टिकट दिया जाएगा। जबकि राममूर्ति को पड़ोसी जनपद आजमगढ़ की सगड़ी सीट से चुनाव लड़ाया जाएगा। आजमगढ़ जनपद सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का संसदीय क्षेत्र है। बताया जाता है कि अखिलेश ने राममूर्ति से कहा कि आप मेरे अत्यंत विश्वसनीय हैं। आप मेरे संसदीय क्षेत्र में मेरे साथ रहेंगे।
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