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बेहतरी के लिए दीनी के साथ दुनियावी तालीम पाना भी जरूरी

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अंबेडकरनगर। इंसान का कर्म ही सबसे बड़ी पूंजी है। यदि इंसान का कर्म अच्छा होगा, तो उसे कयामत तक याद किया जाएगा, लेकिन उसका कर्म अच्छा नहीं हुआ, तो उसे याद तो करेंगे, लेकिन बुरे कामों के लिए याद किया जाएगा। इसलिए हम सभी को चाहिए कि बेहतर कर्म करें। अल्लाह ने कुरान में जो बताया है, उस पर पूरी तरह से अमल करें। इसके लिए जरूरी है कि बेहतर दीनी व दुनियावी तालीम हासिल की जाए। यह बात गुरुवार को मौलाना वसी हसन खां ने कही। वह दहियावर में आयोजित एक मजलिस को संबोधित कर रहे थे।
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मौलाना वसी हसन ने दहियावर स्थित इमामबारगाह में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए कहा कि इस्लाम इंसानियन का पैगाम देता है। अमन व भाइचारगी की डोर मजबूत करने का नाम है इस्लाम। कुछ बहके लोग हैं, जो इस्लाम को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि इससे इस्लाम को किसी भी प्रकार का नुकसान होने वाला नहीं है।
मौलाना ने कहा कि इंसान अपने कर्म से पहचाना जाता है। यदि अच्छे कर्म होंगे, तो बेहतर कार्य के लिए याद किया जाएगा, लेकिन यदि कर्म अच्छा नहीं होगा, तो बुरे काम को लेकर याद होगा। इसलिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि अच्छे कर्म करें और अपने बच्चों को भी अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करे। मौलाना ने कहा कि दीनी तालीम से बेहतर संस्कार मिलते हैं। बाद में मौलाना ने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया।
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इससे पहले मजलिस को बिहार से आए मौलाना अज्मी अब्बास ने भी संबोधित किया। मजलिस की शुरुआत तिलावते कुरान पाक से हुई। कार्यक्रम का संचालन आरिफ अनवर ने किया। इस दौरान मौलाना गुलाम मुर्तजा, मौलाना महफूजुल हसन, अहमद हसन बब्बी, मौलाना मोहम्मद कमर, मौलाना अजमी अब्बास, मौलाना अली हमजा, मौलाना महताब आदि भी मौजूद रहे।
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