ऐसे में जिले के कुल एक हजार 372 परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत दो लाख 14 हजार छात्र छात्राओं को पुरानी पुस्तकों के साथ ही विद्यालय जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। शासन ने 15 जून तक सभी जिलों में पुस्तकों के पहुंचाने का निर्देश दिया था।
30 जून तक बीआरसी कार्यालय से सभी विद्यालयों में छात्र छात्राओं की संख्या के आधार पर पुस्तकें पहुंचने का भी समय निर्धारित कर दिया गया था। अभी तक जिले में पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं।
अंग्रेजी मीडियम विद्यालयों के साथ शिक्षासत्र प्रारंभ करने के लिए बीते एक अप्रैल से परिषदीय विद्यालयों को भी खोले जाने का निर्देश शासन ने दिया था। विद्यालय तो निर्धारित समय पर खुल गए, लेकिन छात्र छात्राओं के हाथों में नई पुस्तकें नहीं पहुंच सकीं। इस बीच 20 मई से ग्राीष्मावकाश हो गया।
एक जुलाई से खुलने पर छात्र-छात्राओं को शिक्षा ग्रहण करने में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए शासन स्तर से निर्णय लिया गया कि 15 जून तक सभी जिलों में पुस्तकें पहुंचा दी जाएं। 25 जून तक यह पुस्तकें छात्रों की संख्या के आधार पर संबंधित बीआरसी कार्यालय भेज दी जाएं तथा 30 जून तक सभी विद्यालयों में पुस्तकें पहुंच जाएं।
शासन की मंशा के अनुसार अब तक ऐसा कुछ भी नहीं हो सका है। आलम यह है कि ग्रीष्मावकाश के बाद एक जुलाई से स्कूल खुलने में महज पांच दिन का समय शेष बचा है लेकिन अब तक जिले में ही पुस्तकें नहीं पहुंच सकी हैं। ऐसे में जिले के एक हजार 352 प्राथमिक व 520 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्यनरत दो लाख 14 हजार छात्र -छात्राओं को किस प्रकार नई पुस्तकें उपलब्ध हो सकेंगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि प्राथमिक विद्यालय के छात्र छात्राओं के लिए कलरव, गिनतारा, हमारा परिवेश, रैंबो, संस्कृत व परख तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय के छात्र छात्राओं के लिए मंजरी, पृथ्वी और हमारा जीवन, अंकगणित, हमारा इतिहास, आओ समझें विज्ञान, वर्तिका, रैंबो, महान व्यक्तित्व, कृषि विज्ञान, गृहशिल्प, हमाया पर्यावरण, स्काउट गाइड, खेल और स्वास्थ्य पुस्तकों की आवश्यकता है।
यह पुस्तकें पीतांबरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड झांसी, डायनमिक टेस्ट बुक प्रिंट झांसी, चाचा प्रिंट फम्र्स लखनऊ, काजिमी एण्ड एसोसिएशन इलाहाबाद से पुस्तकें आनी थी, जो कि अभी तक नहीं आ सकी हैं।