अंबेडकरनगर। मालीपुर क्षेत्र में करीब 15 साल पहले चीनी लदा ट्रक लूटने के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम पवन कुमार शुक्ल की अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। सुनवाई के दौरान ट्रक चालक और क्लीनर ने आरोपियों की पहचान करने से इन्कार कर दिया। वहीं, अभियोजन पक्ष आरोपियों के कब्जे से ट्रक या चीनी की बरामदगी भी साबित नहीं कर सका। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 13 और 14 मार्च 2011 की मध्यरात्रि करीब 12:15 बजे मऊ की मसौधा चीनी मिल से 50-50 किलोग्राम की 640 बोरियां चीनी लादकर ट्रक बिहार के सासाराम जा रहा था। मालीपुर चौराहे से पहले नीली बत्ती लगी एक गाड़ी ने ओवरटेक कर ट्रक को रोक लिया। आरोप था कि गाड़ी में सवार सात लोगों ने चालक रामभुआल यादव और क्लीनर उमेश कुमार को नीचे उतारकर उनकी आंखों पर पट्टी बांध दी। इसके बाद दोनों को सुरहुरपुर-जालालपुर मार्ग स्थित सेठ राइस मिल के पास एक स्कूल में बंद कर दिया गया।
किसी तरह बाहर निकले क्लीनर ने राइस मिल के चौकीदार के जरिए ट्रक मालिक राकेश पांडेय को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर चालक और क्लीनर को मुक्त कराया। ट्रक मालिक की तहरीर पर पहले अकबरपुर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज हुई। बाद में मामला मालीपुर थाने स्थानांतरित कर विवेचना की गई।
दूसरे मामले में गिरफ्तारी के बाद जुड़े थे नाम
विवेचना के दौरान पुलिस ने आजमगढ़ के नरेंद्र प्रताप राय, सुनील पाठक उर्फ जग्गू पाठक, विभूति यादव उर्फ भूपति यादव उर्फ प्रधान, उपेंद्र कुमार राय उर्फ दीपक राय और देवरिया के श्यामानंद तिवारी उर्फ गुड्डू तिवारी को आरोपी बनाया। विवेचक के अनुसार, मार्च 2011 में देवरिया के खुखुंदू थाने में ट्रक लूट के दूसरे मामले में पांचों की गिरफ्तारी हुई थी। वहां मिली जानकारी और तस्वीरों के आधार पर उन्हें इस मामले में नामजद किया गया। 10 मई 2011 को आरोपपत्र दाखिल हुआ और 29 नवंबर 2011 को आरोप तय किए गए। अभियोजन ने आठ गवाह पेश किए।
सुनवाई के दौरान चालक, क्लीनर और ट्रक मालिक ने आरोपियों की पहचान करने से इन्कार कर दिया। अदालत ने पाया कि लूटा गया ट्रक अगले दिन वाराणसी के बड़ागांव क्षेत्र में लावारिस मिला था। अभियोजन डकैती का आरोप युक्तियुक्त संदेह से परे साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर पांचों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।