अंबेडकरनगर। चार वर्ष से फरार हत्या आरोपी की तलाश में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव से ठीक पहले की ताबड़तोड़ छापेमारी ने पुलिस पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। लंबी चुप्पी के बाद अब चुनाव से ठीक पहले इस छापेमारी को सीधे राजनीतिक जोड़तोड़ और साजिश से जोड़ कर देखा जा रहा है। अनौपचारिक बातचीत में भी पुलिस प्रशासन के पास इन लगातार छापों को लेकर कहने को कुछ खास नहीं दिखा। इससे भी स्पष्ट संदेश जा रहा है कि छापों के पीछे आरोपी की तलाश से ज्यादा और भी तमाम मकसद छिपे हुए हैं।
बहुचर्चित पूर्व प्रमुख सुभाष हत्याकांड का एक आरोपी रणविजय सिंह लंबे समय से पेशी पर नहीं जा रहा है। इस मामले में माफिया अजय सिपाही व अन्य के साथ रणविजय के विरुद्ध भी महरुआ पुलिस ने चार्जशीट लगाई। रणविजय समेत अन्य को बाद में जमानत मिल गई, लेकिन रणविजय पेशी से गायब रहने लगा। ऐसे में उसकी जमानत निरस्त हो गई। पुलिस को उसकी 2017 से वारंट के आधार पर तलाश है। उसके घर की कुर्की हो चुकी है, जबकि 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है। उसी की तलाश में पुलिस अजय सिपाही के घर छापा मारने का दावा कर रही है।
पुलिस का यह दावा सवालों के घेरे में इसलिए है क्योंकि वह रणविजय की तलाश में पिछले लंबे समय से इतनी एक्टिव नहीं दिखी थी जितना चुनाव के ठीक पहले। अब जब जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पूर्व प्रमुख माफिया सरगना अजय सिंह सिपाही द्वारा अपने करीबी अमरेंद्र पाल को चुनाव लड़ाने की पुरजोर तैयारी की जा रही है। तभी ऐन मौके पर एक सप्ताह में दो छापे सहज सवाल खड़े कर रहे हैं।
तमाम स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह छापा सिर्फ राजनीति से प्रेरित है। लोगों का कहना था कि चार वर्ष से फरार रणविजय की तलाश में यदि ऐसे ही सप्ताह में दो-दो बार कहीं भी छापेमारी लगातार की गई होती तो अब तक पुलिस को वास्तविक सफलता मिल गई होती।
पुलिस के छापों को लेकर सवाल खड़ा करते हुए सोशल मीडिया पर खूब खिंचाई की गई। कहा गया कि पुलिस को अपनी छवि की भी परवाह करनी चाहिए न कि राजनीतिक दबाव में कहीं भी कूद पड़ना चाहिए।