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चॉकलेट खिलाई, पुचकारा फिर किया पढ़ने को राजी

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अम्बेडकरनगर के भगोला मुसहर बस्ती के अभिभावकों को समझातीं बीईओ सबिस्ता परवीन। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। अब तक स्कूल न जाने वाले बच्चों को चॉकलेट खिलाया। उन्हें पुचकारा, फिर पढ़ने के लिए राजी कर लिया। यह दृश्य गुरुवार को कटेहरी शिक्षा क्षेत्र के भगोला मुसहर बस्ती में देखने को मिला। दैनिक मजदूरी और छोटे मोटे काम कर पेट पालने वाले परिवारों के बीच स्कूल चलो अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कटेहरी की खण्ड शिक्षा अधिकारी सबिस्ता परवीन टीम लेकर पहुंच गईं। अभिभावकों से बात कर उन्हें पढ़ाई के महत्व और राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में बताया। उनके बच्चों संग समय बिताया। चॉकलेट खिलाई। इसके बाद 11 बच्चों का नामांकन कराने में सफलता पाई। बीईओ ने सभी एआरपी, प्रधानाचार्य और शिक्षकों से आह्वान किया कि इसी तरह के प्रयास हमें रोज करने हैं।
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परिषदीय स्कूलों में दाखिला बढ़ाने को लेकर राज्य सरकार की विशेष मुहिम को सफल बनाने के क्रम में कटेहरी शिक्षा क्षेत्र में डोर टू डोर मुहिम का नेतृत्व गुरुवार को खण्ड शिक्षा अधिकारी सबिस्ता परवीन ने किया। वे एआरपी अशर्फीलाल गुप्त, कम्पोजिट विद्यालय भगोला के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मायाराम त्यागी, शिक्षिका ऋतु सिंह, रीता देवी और नोडल प्रभारी इंद्रपाल गौतम को साथ लेकर भगोला मुसहर बस्ती पहुंच गईं। वहां पढ़ाई के महत्व से बेखबर बच्चे खेलते कूदते मिले। बीईओ ने कई घर के अभिभावकों को एक साथ बुलाकर उन्हें पढ़ाई के महत्व को समझाया।
राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और सुविधाओं के बारे में बताया। उनसे कहा कि बच्चे पढ़ लिखकर कुछ बनेंगे तो आप लोग भी सुख सुविधा का जीवन व्यतीत कर सकेंगे। उन्हें यह भी बताया कि कॉपी किताब से लेकर ड्रेस आदि में कोई पैसा नहीं लगेगा। सबिस्ता ने बच्चों से उनका नाम पूछा और पढ़ने के लिए प्रेरित किया। बच्चों को चॉकलेट दी तो वे सब खुशी से चहक उठे।
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खंड शिक्षा अधिकारी ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को पढ़ाकर समाज की मुख्य धारा में शामिल करें और खुद जागरूक होकर शासन की तमाम योजनाओं का पात्रता के आधार पर लाभ उठाएं। एआरपी ने बताया कि प्रवेश पूरी तरह नि:शुल्क है। अब प्राथमिक स्कूल भी कायाकल्प योजना से चमक रहे हैं। बाद में अभिभावकों ने कुल 11 ऐसे बच्चों का दाखिला करा दिया, जो अब तक स्कूल नहीं गए थे। बीईओ ने बाद में सभी एआरपी, प्रधानाध्यापक और शिक्षकों से अपील की कि इसी तरह घर घर जाकर आराम से बात करें। अभिभावकों को समझाएं और बच्चों से संवाद स्थापित करें। इससे निश्चित तौर पर बच्चों का दाखिला कराने में सफलता मिलेगी
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