कृषि विज्ञान पांती में प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र प्राप्त करती कृषि सखी।
अंबेडकरनगर। रासायनिक खादों से बंजर हो रही भूमि को बचाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसके तहत जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 20 कृषि सखियों की जनपद में तैनाती कर दी गई है। यह किसानों को जानकारी देकर जैविक खेती कराएंगी। इससे न सिर्फ भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी बल्कि सरयू का पानी भी प्रदूषित नहीं होगा।
प्रथम चरण में सरयू के किनारे 30 ग्राम पंचायतों में 500 हेक्टेयर प्राकृतिक खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को जैविक खाद बनाने की विधि सिखाने के लिए नदी के सीमावर्ती गांवों में कृषि सखियों को तैनात किया गया है। इनको जैविक खाद बनाने और किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केंद्र पांती के वैज्ञानिकों ने दिया है।
सरयू नदी के अगल-बगल रासायनिक उर्वरक से खेती होने से बारिश के दौरान खेतों की मिट्टी बह कर जाने से नदी का जल प्रदूषित हो रहा था। इससे नदी में रहने वाले जीवों पर असर पड़ रहा था। साथ ही नदी का रसायन मिश्रित जल पीने से जानवरों में तमाम प्रकार की बीमारियां फैल रही थीं। जल को सुरक्षित और केमिकल से मुक्त रखने के लिए शासन के निर्देश पर प्राकृतिक खेती कराए जाने की तैयारी की गई है।
-वर्जन
प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए 20 कृषि सखियोंं को तैनात किया गया है। ये किसानों को प्राकृतिक खेती खेती के तौर-तरीके व इससे होने वाले फायदों के बारे में जागरूक करेंगी।
- डॉ. अश्विनी कुमार सिंह, उपकृषि निदेशक