अंबेडकरनगर। बस्ती के गैलेक्सी आई इंस्टीट्यूट पॉलीक्लिनिक में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने के बाद हंसवर क्षेत्र के रामसूरत समेत चार लोगों की आंख की रोशनी चली गई थी। एसपी से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाने के बाद भी कहीं सुनवाई नहीं हुई तो पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय के आदेश के तीन माह बाद हंसवर पुलिस ने बस्ती के नेत्र विशेषज्ञ समेत दो लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
मुसेपुर कला निवासी रामसूरत (63) ने न्यायालय को दिए गए पत्र में बताया कि उन्हें आंखों से कम दिखाई पड़ता था। हंसवर बाजार में बस्ती के गैलेक्सी आई इंस्टीट्यूट पॉलीक्लिनिक के एजेंट प्रचार प्रसार करने आए थे। आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड के साथ आने पर निशुल्क ऑपरेशन करने की बात कह रहे थे। एजेंट की बात मानकर रामसूरत ने अपने गांव की राधिका सिंह (57), निन्हकू (80), अनारा देवी (71), राजमन (68) के साथ अस्पताल जाने का मन बनाया।
25 नवंबर 2024 को एजेंट के साथ सभी अस्पताल पहुंचे। वहां मौजूद चिकित्सक डॉ. पवन मिश्रा से आंखों की जांच के बाद सभी की आंखों में मोतियाबिंद बताते हुए ऑपरेशन कराने की सलाह दी। उसी दिन चारों लोगों की आंखों का ऑपरेशन भी कर दिया। इसके बाद सभी को घर भिजवा दिया था। आंखों की पट्टी खुलने के बाद राधिका सिंह, निन्हकू, अनारा देवी और राजमन को दिखाई देना बंद हो गया। सभी अपने परिजनों ने साथ अस्पताल पहुंचे और चिकित्सक से आंख की रोशनी चली जाने की बात बताई, लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वहां मौजूद कर्मचारियों ने सभी को वहां से बाहर निकाल दिया। इस घटना की शिकायत सभी ने सामूहिक रूप ने मुख्यमंत्री और पुलिस अधीक्षक से की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद सभी ने कोर्ट की शरण ली थी। 19 जुलाई को पुलिस ने गैलेक्सी आई इंस्टीट्यूट के नेत्र विशेषज्ञ डॉ. पवन मिश्रा और अधिकृत एजेंट के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। थाना प्रभारी वीरेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।
16 अप्रैल को कोर्ट में दाखिल की थी याचिका
16 अप्रैल 2025 को पीड़ित ने दोषी चिकित्सक व उसके एजेंट पर केस दर्ज करने के लिए अपील की थी। मामले में सात जुलाई 2025 को डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव सिविल जज सीनियर डिवीजन ने केस दर्ज करने के आदेश दिए थे।