भीटी के महापारा में श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराते प्रवाचक सूर्यांश महाराज
भीटी। क्षेत्र के महापारा में श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक सूर्यांश महाराज ने बताया कि स्पष्ट लक्ष्य और साहस से परिस्थितियां बदली जा सकती हैं।
अन्याय या दबाव के विरुद्ध खड़े होने का साहस सफलता का मार्ग प्रशस्त करता है। प्रत्येक निर्णय में नैतिकता और मर्यादा का पालन आवश्यक है। रुक्मिणी विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री थीं। भीष्मक मगध के राजा जरासंध के अधीन जागीरदार थे। रुक्मिणी ने कृष्ण के गुण, चरित्र और पराक्रम के विषय में सुनकर मन ही मन उन्हें पति रूप में स्वीकार कर लिया था। दूसरी ओर, राजनीतिक कारणों से रुक्मिणी का विवाह अन्यत्र तय कर दिया गया था। जब रुक्मिणी को अपने विवाह की तैयारी की जानकारी हुई तो उन्होंने एक विश्वस्त ब्राह्मण के माध्यम से कृष्ण के पास संदेश भिजवाया। कथा के बाद कृष्ण और रुक्मिणी विवाह की झांकी निकाली गई। सुसज्जित झांकी को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।