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कर्मचारियों ने की हड़ताल, स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी

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अंबेडकरनगर में मांगों के समर्थन में सीएमओ कार्यालय पर प्रदर्शन करते एनएचएम के कर्मचारी। - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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अंबेडकरनगर। विभिन्न मांगों को लेकर एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल से मंगलवार को जिला अस्पताल समेत तमाम सीएचसी व पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर गईं। लगभग 600 कर्मचारियों की हड़ताल का नतीजा यह हुआ कि बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी और पीएचसी पर पहुंचे मरीजों और उनके तीमारदारों को करारा झटका लगा। एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल के चलते विभिन्न प्रकार की जांचें भी प्रभावित हुईं। मरीज इलाज व जांच कराने के लिए दिनभर इधर-उधर भटकते रहे। इस पर मरीजों व तीमारदारों ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि हड़ताल को देखते हुए स्वास्थ्य सेवा प्रभावित न हो, इसके लिए जिम्मेदारों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी। ऐसे समय में जब बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, तब स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त रखने का प्रबंध होना चाहिए।
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स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का व्यापक असर मंगलवार को जिले में देखने को मिला। कर्मचारियों की हड़ताल से जिला अस्पताल के साथ ही तमाम सीएचसी व पीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह बेपटरी हो गईं। जिले में 600 से अधिक स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी जिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी व पीएचसी पर तैनात हैं। इनमें लगभग 70 चिकित्सक हैं। इनके अलावा एएनएम, स्टाफ नर्स, लैब टेेक्नीशियन, फार्मासिस्ट, वार्ड ब्वॉय शामिल हैं। विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से आंदोलनरत स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों ने सोमवार को शासन से बातचीत असफल होने के बाद पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। मंगलवार को स्वास्थ्य कर्मी संबंधित अस्पताल में पहुंचे जरूर, लेकिन कार्य का बहिष्कार करते हुए धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
हड़ताल का नतीजा यह रहा कि जिला अस्पताल व सभी सीएचसी पर स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुईं। सुबह से ही मरीज व उनके तीमारदार बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर संबंधित अस्पताल में पहुंचे, लेकिन इसके लिए उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सबसे अधिक समस्या विभिन्न प्रकार की जांच को लेकर हुई। एक्स-रे, ब्लड जांच, सीटी स्कैन समेत कई प्रकार की जांच के लिए मरीजों को इधर-उधर भटकने को मजबूर होना पड़ा।
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मांगें का निस्तारण न होने तक जारी रहेगी हड़ताल
सीएमओ कार्यालय के निकट धरने पर बैठे जिलाध्यक्ष वंशमणि पांडेय ने कहा कि लंबे समय से समान कार्य, समान वेतन दिए जाने, वेतन विसंगत दूर किए जाने, विनियमितीकरण किए जाने की मांग की जा रही है, लेकिन कोई ठोस कदम जिम्मेदारों की ओर से नहीं उठाया जा रहा है। इसके चलते कर्मचारियों का हक मारा जा रहा है। जिला उपाध्यक्ष डॉ. आमिर अब्बास व जिलामंत्री डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि आउटसोर्सिंग प्रक्रिया को समाप्त करने, रिक्त स्थानों पर तैनाती किए जाने, गैर जनपद में रिक्त पदों पर तैनाती किए जाने की मांग को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। कहा कि सोमवार को संगठन की शासन से बातचीत हुई थी, लेकिन वार्ता पूरी तरह से विफल रही। कुछ मांगों को लेकर शासन ने सहमति जरूर जताई, लेकिन वह भी मौखिक रूप से। लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। ऐसे में मजबूर होकर अब उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारंभ करनी पड़ी। चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों का निस्तारण नहीं होगा, तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।
जिला अस्पताल में प्रभावित रहा कार्य
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों की हड़ताल से कार्य प्रभावित रहा। विभिन्न प्रकार की जांचें भी प्रभावित हुईं। हालांकि आने वाले मरीजों को इलाज में किसी भी प्रकार की मुश्किल न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई। मरीजों व उनके तीमारदारों को कुछ समस्या जरूर हुई।
अस्पताल में नहीं हो सकी जांच, भटकते रहे मरीज
सात सूत्री मांगों को लेकर संविदा कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते जिला अस्पताल में विभिन्न प्रकार की जांच कराने के लिए आए मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नगपुर से आए मरीज गोविंद दयाल ने कहा कि वे कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां आने पर जानकारी हुई कि हड़ताल है। ऐसे में अब उन्हें बगैर वैक्सीन लगवाए ही लौटना पड़ रहा है। डइयाडीह से आए मोहम्मद शादान ने कहा कि वे शुगर की जांच कराने के लिए जिला अस्पताल आए थे। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते जांच नहीं हो सकी। अब ऐसे में मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। गौहन्ना निवासी चितबहाल ब्लड जांच के लिए जिला अस्पताल गए। चूंकि चिकित्सक ने जिला अस्पताल में जांच के लिए लिखा था। ऐसे में वे जांच कराने गए, लेकिन हड़ताल के चलते ब्लड जांच नहीं हो सकी। राजेसुल्तानपुर से आईं सुभाषिनी पांडेय ने कहा कि वे जांच कराने के लिए लंबी दूरी तय कर जिला अस्पताल पहुंची थीं। यहां पता चला कि हड़ताल है। इसके चलते जांच नहीं होगी। अब बगैर जांच के ही उन्हें लौटना पड़ रहा है। उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जांच का कार्य सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए जिम्मेदारों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए थी।
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