फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बिजली की किल्लत, सवा लाख पावरलूमों को झटका

विज्ञापन
विज्ञापन
अंबेडकरनगर। बिजली संकट ने जिले के वस्त्र उद्योग को तगड़ी चपत लगाई है। दिन व रात मेें हो रही बिजली कटौती ने पावरलूमों की खटरपटर को शांत कर दिया है। नतीजा यह है कि पूरे जिले में लगभग सवा लाख पावरलूमों का सुचारु संचालन नहीं हो पा रहा है। इससे कपड़े का उत्पादन बड़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है। इससे एक तरफ जहां पावरलूम मालिकों को होने वाली आय घटी है, वहीं बुनकर मजदूरों के सामने पेट पालने का संकट दिखने लगा है। यह हाल अंबेडकरनगर जिले में तब है, जब राज्य सरकार ने एक जनपद, एक उत्पाद योजना के तहत वस्त्र उद्योग व पावरलूम को शामिल कर रखा है।
विज्ञापन

वस्त्र उद्योग के लिए न सिर्फ देश के विभिन्न हिस्सों, वरन विदेशों तक में अंबेडकरनगर की पहचान है। यहां सबसे पहले टांडा में टेरीकाट कपड़ों के निर्माण का काम शुरू हुआ था। इसीलिए टांडा के टेरीकाट की ख्याति दूर-दूर तक फैली। समय के साथ ही टांडा नगर से बढ़कर पावरलूमों की स्थापना जिले के अन्य क्षेत्रों में भी हुई। पावरलूमों को चलाने के लिए जिस बिजली की आवश्यकता होती है, बुनकर उसी संकट से इन दिनों सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं।
टांडा के अलावा जिला मुख्यालय के मीरानपुर व शहजादपुर समेत इल्तिफातगंज, हंसवर, भूलेपुर, किछौछा, मिझौड़ा, जहांगीरगंज तथा जलालपुर में लगभग सवा लाख पावरलूम स्थापित हैं। इन पावरलूमों पर शर्ट, लुंगी, गमछा, अराफाती रूमाल आदि बनाए जाते हैं। इनकी बड़े पैमाने पर खपत होती आ रही है। पिछले कुछ दिनों से बिजली संकट इस कदर गहरा गया है कि पावरलूम उद्योग को करारी चोट लगी है। अब उत्पादन आधा रह गया है। इसका खामियाजा न सिर्फ पावरलूम मालिकों को भुगतना पड़ रहा है, वरन वहां काम करने वाले मजदूरों के सामने पेट पालने का संकट खड़ा हो गया है। दरअसल पावरलूमों की खटरपटर शांत रहने से मजदूरों को अक्सर मायूस होकर बैठे ही रहना पड़ता है।
विज्ञापन

बिजली की बदहाली से बुनकर परेशान
अकबरपुर नगर के शहजादपुर पूर्वी मोहल्ला निवासी बुनकर मोहम्मद अंसार बिजली की बदहाली से परेशान हैं। बताया कि बिजली की हालत ठीक थी तो सप्ताह में 1500 से दो हजार रुपये का काम हो जाता था, लेकिन बिजली की अघोषित कटौती से पावरलूम ठीक से चल ही नहीं पा रहा है। इसके चलते कमाई भी आधे से कम हो गई है। बीत रहे सप्ताह में इस बार वे अब तक महज 800 रुपये तक का ही काम कर पाए हैं। शाहजहांपुर निवासी बुनकर अहेदुल्लाह भी बिजली की आवाजाही से परेशान हैं। बताया कि पिछले करीब एक सप्ताह से स्थिति ज्यादा खराब हो गई है। पहले जहां सप्ताह भर में 12 से 1500 रुपये तक का काम हो जाता था, वहीं इस सप्ताह वे सिर्फ 650 रुपये का ही काम कर पाए हैं। जलालपुर के दलालटोला निवासी बुनकर रफी अहमद ने बताया कि उनके पास चार पावरलूम मशीन हैं। बताया कि जब 18 से 20 घंटे की बिजली मिल रही थी तो सप्ताह में एक पावरलूम से लगभग 100 मीटर कपड़ा तैयार होता था, लेकिन करीब एक पखवाड़े से सप्ताह में एक पावरलूम से 30 से 40 मीटर ही कपड़ा तैयार हो रहा है। इससे मजदूरों की दिहाड़ी तक नहीं निकल पा रही है। बुनकर तनवीर अहमद भी बिजली की समस्या से त्रस्त हैं। बताया कि सप्ताह में पहले दो हजार से 2500 रुपये तक की कमाई हो जाती थी, लेकिन इन दिनों तो 700 से 800 रुपये की कमाई हो पाना भी मुश्किल हो गया है। कहा कि बिजली की इस बदहाली से घर का खर्च चल पाना भी मुश्किल हो जाएगा।
पहले बनते थे 25 गमछे, अब 15 ही
टांडा के बुनकर मोहम्मद खालिद कहते हैं कि एक लूम पर समुचित बिजली मिलने पर करीब 25 गमछे तैयार होते थे। अब 15 से 16 गमछे ही बन पा रहे हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से उत्पादन प्रभावित हुआ है। बुनकर मजदूर फारूक रियाज ने बताया कि पहले सप्ताह में तीन हजार रुपये तक की मजदूरी काम के बदले मिल जाती थी। इसमें गुजर-बसर हो जाया करती थी। अब बहुत मेहनत के बाद दो हजार के आसपास मिल पा रहे हैं। रोजा व ईद के कारण जब खर्च बढ़ गया है तब आमदनी घट गई है। खालिद व रियाज ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को बिजली आपूर्ति की बेहतरी सुनिश्चित करने की तरफ ध्यान देना चाहिए।
नहीं चार्ज हो पा रही बैट्री, कैसे चले ई-रिक्शा
फरीदपुर निवासी हरिश्चंद्र का कहना है कि बिजली की अच्छी व्यवस्था रहने पर बैट्री प्रतिदिन फुल चार्ज हो जाती थी। इससे वे दिन में लगभग 100 किलोमीटर का सफर तय कर 400 से 500 रुपये तक की कमाई कर लेते थे। परंतु पिछले कुछ दिनों से रात भर चार्जिंग लगे रहने के बावजूद 30 से 40 प्रतिशत ही बैट्री चार्ज हो पाती है। ऐसे में 25 से 30 किलोमीटर ही चल पा रहे हैं। इससे खर्च निकलना भी मुश्किल हो गया है। भीटी के ई-रिक्शा चालक रोहित चौधरी भी बिजली की समस्या से खासे त्रस्त हैं। बैट्री ठीक ढंग से चार्ज न होने की वजह से वे करीब एक सप्ताह से ई-रिक्शा नहीं चला रहे हैं। बताया कि सप्ताह भर बाद आज ई-रिक्शा सड़क पर लेकर आया हूं, वह भी परिवार के सदस्य को लेकर उपचार कराने जा रहा हूं। बताया कि रात भर चार्जिंग में लगाने के बावजूद बैट्री चार्ज नहीं हो पा रही है। इससे उन्हें प्रतिदिन 300 से 400 रुपये का नुकसान हो रहा है। कहा कि सरकार को अविलंब बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर करना चाहिए।
हालात में जल्द हों सुधार
बुनकर एकता फेडरेशन के जिलाध्यक्ष नदीम अंसारी ने कहा कि हालात में जल्द सुधार की जरूरत है। बुनकरों को ठीक से बिजली नहीं मिल पा रही है। रोजा व ईद के समय जब ठीक से बिजली की जरूरत है, जिससे बुनकरों का पेट भर सके तो उस समय प्रशासन को बेहतर व्यवस्था करनी चाहिए। बुनकर एकता विकास समिति प्रदेश अध्यक्ष कासिम अंसारी ने कहा कि बिजली की कम आपूर्ति से काम प्रभावित है। लेकिन रोजा के चलते पावरलूम कुछ कम चल रहे हैं। अब ईद के बाद फिर से पावरलूमों का संचालन बढ़ेेगा। तब तक बिजली की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें