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होनहार युवाओं की बदौलत गांव में चल रही बच्चों की पाठशाला

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अंबेडकरनगर। कोरोना महामारी के बीच अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के घाघूपुर गांव निवासी मुकेश कुमार व राकेश कुमार ने मिसाल कायम की है। कोरोना के चलते बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है। ऐसे में दोनों युवाओं ने गांव के बच्चों की शिक्षा को प्रभावित न होने की ठान ली। उन्होंने पहले गिने चुने बच्चों को शिक्षा देने की मुहिम शुरू की जो मौजूदा समय में बढ़कर 55 के पार पहुंच गई। युवाओं का यह प्रयास सिर्फ गांव में ही चर्चा का विषय नहीं है, बल्कि दूर दराज के क्षेत्र में भी युवाओं की इस पहल की सराहना हो रही है। प्रतिदिन सुबह-शाम छह घंटे सोशल डिस्टेंसिंग के बीच बच्चों की पढ़ाई का कार्य चल रहा है।
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अकबरपुर अयोध्या मार्ग पर शिवबाबा के निकट स्थित घाघूपुर ग्राम पंचायत के दो युवाओं ने लॉकडाउन के बीच मिसाल पेश की है। बीएससी तक पढ़ाई करने वाले गांव निवासी मुकेश राजभर व इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त कर चुके राकेश राजभर इन दिनों महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कोरोना के चलते सरकार ने जहां सभी स्कूल-कॉलेज आदि बंद कर दिए, वहीं इन युवाओं ने गांव के बच्चों की शिक्षा न प्रभावित हो, इसके लिए मुहिम छेड़ दी। अप्रैल में युवाओं ने गांव के गिने चुने बच्चों को शिक्षा देने की मुहिम शुरू की।
युवाओं के इस सकारात्मक प्रयास को अन्य ग्रामीणों ने सहयोग दिया। धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ने लगी और मौजूदा समय में संख्या बढ़कर 55 हो चुकी है। इसमें कक्षा 1 से 8 तक के बच्चे शामिल हैं। दोनों युवा प्रतिदिन सुबह 7 से 10 बजे व शाम 4 बजे से 7 बजे तक बच्चों को पढ़ाने का काम सोशल डिस्टेंसिंग के बीच करते हैं।
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शिक्षक की भूमिका निभा रहे मुकेश कुमार व राकेश ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से बच्चों की शिक्षा सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही थी। इसके चलते ही उन लोगों ने यह योजना बनायी। स्थान नहीं मिल रहा था तो गांव निवासी खुशीराम से बात की गई। उनके घर के सामने पर्याप्त जगह हैं। यहां बच्चों को शिक्षा देने में कोई कठिनाई नहीं होती। प्रतिदिन बच्चे समय से पहुंच जाते हैं। लोगों से मिल रहा प्रोत्साहन से खुशी महसूस होती है। गांव निवासी निलेश मिश्र ने युवाओं की तरीफ की। कहा कि युवाओं द्वारा प्रतिदिन चलायी जा रही 6 घंटे की पाठशाला से न सिर्फ बच्चों को शिक्षा मिल रही, बल्कि गांव के माहौल में भी परिवर्तन हो रहा है। कोरोना में छोटे बच्चों की शिक्षा को लेकर अभिभावक ज्यादा परेशान हैं। इन युवाओं ने गांव के अभिभावकों की यह समस्या दूर कर दी है।
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