अंबेडकरनगर। बंदरों के बढ़ते उत्पात और उनसे होने वाली घटनाओं पर नियंत्रण के लिए जिला प्रशासन की ओर से जिला स्तरीय समिति का गठन किया गया है। यह समिति बंदरों से उत्पन्न हो रहे मानव-बंदर संघर्ष की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करेगी।
यह निर्णय माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों तथा शासन स्तर से प्राप्त आदेशों के अनुपालन में लिया गया है। समिति की अध्यक्षता स्वयं जिलाधिकारी करेंगे, जबकि विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी और नामित प्रतिनिधि इसके सदस्य होंगे। समिति जनपद के नगर निकायों और ग्राम पंचायतों में उन क्षेत्रों की पहचान करेगी, जहां बंदरों का अधिक उत्पात है। ऐसे हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां विशेष कार्ययोजना लागू की जाएगी।
इसके साथ ही एक हेल्पलाइन भी स्थापित की जाएगी, ताकि आमजन अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें और उन पर त्वरित कार्रवाई हो सके। प्रशिक्षित टीमों और संस्थाओं के माध्यम से बंदरों को सुरक्षित तरीके से पकड़कर आबादी से दूर उपयुक्त वन क्षेत्रों में छोड़ा जाएगा।
प्रभारी डीएम/सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला ने जनपदवासियों से अपील की कि वे बंदरों को अनावश्यक रूप से भोजन न दें, कूड़ा खुले में न फेंकें और किसी भी प्रकार की समस्या होने पर प्रस्तावित हेल्पलाइन पर तुरंत सूचना दें। इसके अलावा वन विभाग के सहयोग से जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि लोगों को सावधानी और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा सके और मानव-बंदर संघर्ष की घटनाओं को कम किया जा सके।
धार्मिक भावनाओं का भी रखा जाएगा ध्यान
धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा बंदरों को भोजन कराने के लिए निर्धारित स्थान चिह्नित किए जाएंगे। इन तय स्थानों के अलावा अन्य जगहों पर बंदरों को खाना खिलाने पर रोक लगाई जाएगी। बंदरों की बढ़ती संख्या का एक बड़ा कारण खुले में मिलने वाला भोजन है। इसे रोकने के लिए नगरीय निकायों को सख्त कूड़ा प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बंदरों को आसानी से भोजन न मिल सके।