जलालपुर। तहसील क्षेत्र में इन दिनों निराश्रित कुत्तों का आतंक तेजी से बढ़ रहा है। सीएचसी भियांव सेमरा में पिछले 15 दिनों में लगभग 800 लोग डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) का शिकार हो चुके हैं। गलियों में खेलते बच्चे हों या सुबह की सैर पर निकले बुजुर्ग, हर कोई इन कुत्तों के निशाने पर है।
अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग सौ मरीज एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं, जिससे सुबह से ही लंबी कतारें लग जाती हैं। घायलों में बच्चों की संख्या सबसे अधिक है, जिन्हें कुत्ते अक्सर चेहरे और पैरों पर निशाना बना रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अप्रैल की भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ते तापमान के कारण बेजुबान जानवर भोजन व पानी की कमी से आक्रामक हो रहे हैं।
वर्तमान में सीएचसी भियांव में दाउदपुर की सौम्या (13), दारानगर के अंकित यादव (18), फुलवारी के विशाल (14), सिंगोरिया की बबीता (40), मुंडेहरा की सुमन (24), मदरहा की अनारा देवी (75), रतना की उषा (13), नूरपुर कला के जोखाई यादव (55), मुंडेहरा के रामप्रसाद (61), मंजीरा के आरुष (4) और मुंडेहरा के अखंड (3) का उपचार चल रहा है। इन सभी को एआरवी (एंटी-रेबीज वैक्सीन) लगाने के साथ ही आवश्यक चिकित्सा सहायता दी जा रही है।
ऐसे करें सुरक्षा
सीएचसी अधीक्षक डॉ. बृजेश यादव ने बताया कि कुत्ता काटने (डॉग बाइट) पर घाव को तुरंत साफ पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जाकर एंटी-रेबीज का इलाज शुरू करवाना चाहिए और टीटी (टिटनेस) का इंजेक्शन जरूर लगवाना चाहिए। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे छोटे बच्चों का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि कुत्तों के हमले का सबसे अधिक खतरा उन्हीं को होता है।
गर्मी में आक्रामक हो जाते हैं कुत्ते
मौसम में बदलाव का सीधा असर पशु-पक्षियों के व्यवहार पर भी पड़ता है। गर्मी के दौरान कुत्ते अधिक आक्रामक हो जाते हैं, जिसके कारण डॉग बाइट की घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में लोगों को सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
- डॉ. अरविंद कुमार सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी