फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पत्रकार के परिवारीजनों पर टूटा दुखों का पहाड़

Sat, 13 Feb 2016 10:37 PM IST
अंबेडकरनगर/अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
पटरी पर लौटती जिंदगी के बीच हुई पत्रकार करुण की हत्या ने परिवार में एक बार फिर से भूचाल ला दिया। दरअसल लगभग एक दशक पूर्व लव मैरिज के चलते करुण को जेल भी जाना पड़ा था। उस घटना ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया था, तो अब उससे कई गुना बड़ा दर्द सामने आ पड़ा है।
विज्ञापन


तरौली मुुबारकपुर गांव निवासी रामअजोर मिश्र के परिवार में दुखों का एक नया तूफान आ खड़ा हुआ है। लगभग 75 वर्षीय रामअजोर सेक्रेटरी के पद पर कार्यरत थे, तभी बीमारी के चलते उनके पुत्र कृष्णकुमार मिश्र का निधन अब से लगभग 2 दशक पूर्व हो गया। परिवार उससे उबर कर आगे बढ़ चला था।

इसी बीच वर्ष 2006 में कृष्णकुमार के सबसे छोटे पुत्र करुण ने नाबालिग उम्र में ही ग्राम पंचायत की एक सजातीय बालिका से प्रेम विवाह कर लिया। दोनों गांव से अन्यत्र चले गए। मामले में मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने दोनों को बरामद किया। नाबालिग होने की वजह से करुण के साथ साथ उसकी प्रेमिका शीतू को भी पुलिस ने पकड़ कर चालान कर दिया।
विज्ञापन


लगभग ढाई माह बाद करुण छूट गया तो वह रोजगार के सिलसिले में गुजरात चला गया। काफी दिनों के प्रयास के बाद शीतू भी छूटी तो वह भी करुण के साथ गुजरात चली गई। वहां से लगभग पांच वर्ष बाद दोनों वापस लौटे तो गांव में रहने की बजाए सुल्तानपुर जाकर रहने लगे।

शीतू का तो गांव आना जाना एकदम नहीं था, लेकिन करुण कभी कभार आता जाता था। यहां उसके बाबा रामअजोर के अलावा मां उर्मिला देवी तथा खेती करने वाले बड़े भाई अरुण मिश्र रहते हैं। मझला भाई अश्विनी मिश्र मुंबई की एक फैक्ट्री में काम करते हैं। करुण को एक पांच वर्ष का पुत्र करुणकृष्ण तथा 10 दिन की एक पुत्री भी है।

सुल्तानपुर में करुण के रहने के बाद से सब कुछ सामान्य होने लगा था। परिवार के लोग भी करुण के सुखी रहने से निश्चिंत हो गए थे। इस बीच शनिवार को अचानक हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस परिवार पर वज्रपात सा कर दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद से बड़े भाई अरुण के अलावा चाचा रमेश व गोपाल आदि सुल्तानपुर पहुंच गए, और वहां पोस्टमार्टम आदि की प्रक्रिया को पूरा कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें