बेटियों के गायब होने का सिलसिला अंबेडकरनगर में भी कम नहीं है। यहां भी कई बेटियां रहस्यमय ढंग से लापता हो चुकी हैं। इन मामलों में परिवारीजनों द्वारा बेटियों को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने समेत अपहरण का केस दर्ज कराया गया है। तमाम मामलों में बेटियों का पता ही नहीं चला है।
पुलिस विभाग के रिकार्ड के मुताबिक वर्ष 2015 में गायब हुई 15 बेटियों में से सिर्फ 7 ही मिल सकी है। 11 अभी भी लापता हैं। परिजन उनकी तलाश के लिए लगातार पुलिस के दरवाजे खटखटा रहे हैं। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक छात्रा का शव मिलनेे के मामले ने पूरे प्रदेश में एक बार फिर से हड़कंप मचा दिया है।
इसमें हैवानियत का भी मामला सामने आया है। पड़ताल में पता चला कि यहां भी तमाम बालिकाएं अभी भी लापता चल रही हैं। वर्ष 2013 में चार बालिकाएं गायब हुई थीं। चारों वापस आ गईं। वर्ष 2014 में एक बालिका गायब हुई थी, जो 6 माह बाद ही बरामद हो गई।
वर्ष 2015 में 18 बालिकाएं गायब हुईं। इनमें से टांडा की अमिता, हंसवर की अनूपा देेवी व मालीपुर की कैसर समेत सात बालिकाएं बरामद हो गईं। हालांकि अकबरपुर की सुमन, अकबरपुर की ही सुधा व सम्मनपुर की अंजू समेत कुल 11 बालिकाएं अपहरण के बाद से वापस घर नहीं लौट सकीं।
ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि बालिकाओं को बरामद करने को लेकर पुलिस कितना संजीदा है। मौजूदा वर्ष के लगभग डेढ़ माह में पुलिस के लिए यह राहत की बात है कि रिकार्ड के मुुताबिक अभी तक एक भी बालिका अपहृत नहीं हुई है।