अंबेडकरनगर। खेल प्रतिभा के मामले में यह जिला पीछे नहीं है। फुटबॉल, कुश्ती और हॉकी जैसे खेलों में यहां के खिलाड़ियों ने प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। लेकिन क्रिकेट, जिसे भारत में जुनून कहा जाता है। यहां संसाधनों के अभाव में संघर्ष और उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
करीब 10 वर्षों बाद एकलव्य स्टेडियम में क्रिकेट कोच की नियुक्ति ने खिलाड़ियों में नई उम्मीद जगाई थी। वर्तमान में लगभग 40 खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें से कई प्रदेश स्तर तक खेल चुके हैं। पर वास्तविक चुनौती वहां से शुरू होती है, जहां खिलाड़ियों को मैदान, पिच और बुनियादी सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ता है। दो साल पहले स्टेडियम के एक कोने में एक अस्थायी प्रैक्टिस पिच तैयार की गई थी, लेकिन हालात यह हैं कि एक समय में केवल एक बल्लेबाज ही अभ्यास कर सकता है। नेट नहीं है, रनअप के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं। इससे खिलाड़ी केवल तकनीक सुधार तक ही सीमित रह जाते हैं, मैच खेलने का अनुभव नहीं मिल पाता है।
बिना मुकाबले के अनुभव अधूरा
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युवा क्रिकेट खिलाड़ी सूरज कहते हैं कि हम हर दिन अभ्यास करते हैं, लेकिन जब मैदान ही नहीं है, तो हमारी मेहनत अधूरी रह जाती है। नेट प्रैक्टिस से तकनीक सुधरती है, पर मैच का अनुभव नहीं मिलता।
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गोपाल का कहना है कि हम ट्रायल्स तक तो पहुंच जाते हैं, लेकिन वहां जाकर साफ लगता है कि हमें खेल के अनुभव की कमी है। बाकी जिलों के खिलाड़ी बेहतर तैयारी के साथ आते हैं और बिना संसाधन के वहीं रुक जाते हैं।
वैकल्पिक अभ्यास स्थल पर विचार
एकलव्य स्टेडियम में फिलहाल सिंथैटिक ट्रैक का निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे क्रिकेट के लिए जगह सीमित हो गई है। खिलाड़ियों की समस्या को देखते हुए वैकल्पिक अभ्यास स्थल की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है।
शीला भट्टाचार्य, जिला क्रीड़ा अधिकारी