इसके लिए कई बार डीआईओएस कार्यालय से निर्देश जारी किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। ऐसे में अब डीआईओएस कार्यालय से संबंधित महाविद्यालयों को प्रथम कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसमें 12 दिसंबर तक फीडिंग का कार्य पूर्ण कर लेने का निर्देश दिया गया है।
यदि निर्धारित समय पर फीडिंग नहीं कराई जाती, तो इन विद्यालयों में अध्यनरत 20 हजार छात्र छात्राएं शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित हो सकते हैं। छात्र छात्राओं को पढ़ाई जारी रखने में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए शासन द्वारा शुल्क प्रतिपूर्ति योजना चलाई जा रही है। योजना के तहत छात्र छात्राओं को कोर्सवार फीस की धनराशि उपलब्ध कराई जाती है।
शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि समय पर उपलब्ध कराने के लिए छात्र छात्राओं द्वारा कई बार धरना प्रदर्शन भी किए गए लेकिन प्रशासन ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। शुल्क प्रतिपूर्ति को लेकर मौजूदा समय में भी 60 महाविद्यालयों की लापरवाही का मामला उजागर हुआ है।
गौरतलब है कि जिले में 140 महाविद्यालय हैं। इनमें से 60 महाविद्यालय ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक अध्यनरत छात्र छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिलाने के लिए उनकी कोर्सवार फीडिंग नहीं कराई है। इसके लिए कई बार डीआईओएस कार्यालय से महाविद्यालयों को पत्र भेजकर कार्य पूर्ण कर लिए निर्देश भी दिए गए, लेकिन किसी भी महाविद्यालय द्वारा फीडिंग का कार्य नहीं पूर्ण कराया जा सका है।
इस कार्य पूर्ण करने अंतिम तारीख 12 दिसंबर है। महाविद्यालयों की इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए शनिवार को डीआईओएस डा. आरपी वर्मा ने सभी संबंधित महाविद्यालयों को प्रथम नोटिस जारी करते हुए 12 दिसंबर तक फीडिंग का कार्य पूर्ण करने का निर्देश दिया है। यदि निर्धारित समयावधि में फीडिंग का कार्य पूर्ण नहीं किया गया, तो इन महाविद्यालयों में अध्यनरत लगभग 20 हजार छात्र छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रहना पड़ सकता है।